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मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी धारा प्रवाह काम कर रहे हैं। इस बार की पारी में वे धड़ाधड़ योजनाएं शुरू कर रहे हैं। इसी क्रम में उनके द्वारा मत्स्य पालन के विकास को लेकर घोषणाएं की गई हैं। अब प्रदेश में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की तरह गढ़वाल और कुमाऊँ मत्स्य मण्डियाँ खोली जाएंगी। दून में मत्स्य प्रसंस्करण यूनिट का शिलान्यास करते हुए मुख्यमंत्री ने इन योजनाओं को सफल बनाने का संकल्प भी व्यक्त किया। राष्ट्रीय मत्स्य पालक दिवस के अवसर पर बीते कल मुख्यमंत्री ने कहा कि मत्स्य निदेशालय बड़़ासी ग्रांट की प्रसंस्करण यूनिट पूरी लगन से काम करे और मत्स्य उद्योग को बढ़ावा दे। मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा दिया जाना व्यवहारिक है और इस काम में खर्च होने वाली बिजली की दरें कृषि उद्योग जैसी ही होनी चाहिएं ताकि मत्स्य उद्यमी उत्साहित हो सकें। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उधमसिंह नगर और हरिद्वार में ग्राम समाज के तालाबों में मत्स्य पालन उद्योग में लगे दो व्यक्तियों को सम्मानित भी किया। एक मत्स्य उद्यमी हरिद्वार से है और दूसरा उधमसिंहनगर से। मत्स्य संपदा योजना को बढ़ावा देने पर मुख्यमंत्री ने खासा जोर दिया और कहा कि स्वरोजगार एवं स्वावलंबन की दिशा में मत्स्य उद्योग कारगर कदम है। मुख्यमंत्री ने यह स्वीकार किया कि गुजरे पाँच साल में उत्तराखण्ड में मछली फार्मिंग में बहुत तेजी से काम किया गया है परन्तु मत्स्य उत्पाद के विपणन की व्यवस्था में अभी खामियाँ हैं जिन्हें दूर किया जाना है। विपणन ऐसा हो कि मत्स्य उद्योगी अच्छी कीमत हासिल कर सकें और मत्स्य उद्योग के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार हो। इसमें दो राय नहीं कि विपणन और प्रसंस्करण किसी भी उद्योग की आत्मा हैं। उत्तराखण्ड में मछली उत्पादन का जबरदस्त स्कोप है। युवक और युवतियाँ मत्स्य उत्पादन में रिकार्ड कमाई कर सकती हैं। राज्य सरकार को अपने स्तर से कम से कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराना चाहिए। मछलियों के अच्छे स्वास्थ के लिए चिकित्सा व्यवस्था का वातावरण तैयार होना चाहिए। तभी जाकर लोगों को मछली के रूप में स्वस्थ उत्पाद प्राप्त होगा। मछली उत्पादन के लिए बनाए जाने वाले तालाब राज्य के पर्यावरण को भी संतुलित रखेेंगे। वर्षा के पानी का इस काम के लिए अधिक से अधिक सद्पयोग किया जाना चाहिए। इस तरह मछली उत्पादन को बहुआयामी गतिविधि का स्वरूप दिया जा सकता है।

 

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