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मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार दोहरे अंकों में बढ़ा निर्यात

देश के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में फरवरी महीने में दोहरे अंकों में बढ़ोतरी हुई है। नरेंद्र मोदी सरकार के सत्ता संभालने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है। इसके तहत इंजिनियरिंग गुड्स के निर्यात में 47 प्रतिशत का इजाफा हुआ। ग्लोबल डिमांड बढऩे से विदेशी बाजार में इन सामानों की मांग बढ़ी। कुछ ऐनालिस्टों का कहना है कि पिछले पांच साल में यह सबसे तेज ग्रोथ है। हालांकि, आयात में भी 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिससे व्यापार घाटा बढ़कर 8.8 अरब डॉलर पहुंच गया, जो साल भर पहले के इसी महीने में 6.5 अरब डॉलर था।
फरवरी में एक्सपोर्ट 17.48 प्रतिशत बढ़कर 24.5 अरब डॉलर रहा। जून 2014 के बाद पहली बार एक्सपोर्ट ग्रोथ डबल डिजिट में रही है। एक्सपोर्ट के 30 में से 23 सेक्टर्स में ग्रोथ हुई है, जिसकी अगुवाई आयरन ओर सेक्टर ने की है। कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री ने एक स्टेटमेंट में बताया, ‘पिछले साल सितंबर के बाद से एक्सपोर्ट में रिकवरी हो रही है। इस साल फरवरी में पहली बार डबल डिजिट पॉजिटिव ग्रोथ दिखी है। कुल मिलाकर ट्रेड बैलेंस बेहतर हुआ है।Ó गोल्ड आयात पिछले महीने 147 प्रतिशत बढ़कर 33.3 अरब डॉलर का रहा। इससे आने वाले कुछ महीनों में देश से जेम्स और जूलरी एक्सपोर्ट बढऩे की उम्मीद है।
नॉन-ऑइल, नॉन-गोल्ड इंपोर्ट फरवरी में 5 प्रतिशत बढ़ा जो इससे पिछले महीने में 4 प्रतिशत बढ़ा था। इससे डोमेस्टिक डिमांड के मजबूत होने का पता चलता है। ऑइल इंपोर्ट फरवरी में 60 प्रतिशत बढ़कर 7.6 अरब डॉलर का रहा, जबकि नॉन-ऑइल इंपोर्ट 13.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 25.7 अरब डॉलर का। भारतीय एक्सपोर्ट सेक्टर का प्रदर्शन शानदार है क्योंकि इस महीने में चीन के निर्यात में 1.3 प्रतिशत की गिरावट आई है। वहीं, चीन ने इस महीने ट्रेड डेफिसिट दिखाया, जो उसके लिए अनहोनी ही है।
इस बारे में फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंज के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय ने कहा, यह पॉजिटिव ग्रोथ है, लेकिन लॉन्ग टर्म में हालात चुनौतीपूर्ण लग रहे हैं क्योंकि भारतीय करेंसी में दूसरी इमर्जिंग मार्केट्स की करेंसी की तुलना में मजबूती आ रही है। हमें पूरे वित्त वर्ष में एक्सपोर्ट 270 अरब डॉलर का रहने की उम्मीद है। सहाय ने अमेरिका में संरक्षणवाद के बढ़ते शोर-शराबे को बड़ा खतरा बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी की वकालत कर रहे हैं, जिससे ग्लोबल ट्रेड को लेकर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।

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