उपलब्धियाँ

100 दिन की उपलब्धियाँ

एम.एस चौहान,पत्रकार

धामी सरकार 100 दिन की उपलब्धियाँ गिना रही है। इन उपलब्धियाँ में भले ही केन्द्र सरकार की उपलब्धियाँ शामिल हैं परन्तु राज्य सरकार की समर्पित भावना को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि राज्य में डबल इंजन चल रहा है। हालाँकि, धामी सरकार से उम्मीद की जा सकती है कि ये डबल इंजन और तेजी से दौडेगा और तय समय सीमा से पहले ही लक्ष्य तक पहुँच जाएगा। सरकार ने वृद्धास्था पेंशन को बढ़ाकर 1500 कर दिया है। अब बुजुर्ग पति के साथ-साथ पत्नी को भी पेंशन की सुविधा मिलेगी। टिहरी क्षेत्र में टूरिस्ट डेस्टिीनेशन की दूरगामी योजना के तहत 4 हजार से अधिक होम स्टे पंजीकृत हो चुके हैं। सरकार का दावा कि इस योजना के तहत अब तक 12 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिल चुका है। सरकार ने कुमाऊँ मंडल के जर्जर मंदिरों को दुरूस्त करने के लिए भव्य योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। इस योजना का उद्देश्य है क्षेत्र के धार्मिक-सांस्कृतिक वातावरण को बेहतर बनाना। दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान योजना भी एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसमें अभी तक 800 करोड़ रूपये से अधिक का ऋण दिया जा चुका है। इस ऋण पर सरकार किसी तरह का ब्याज नहीं ले रही। अभी तक 1.21 लाख किसान इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। उत्तराखण्ड को सैनिक क्षेत्र कहा जाता है। राज्य सरकार इसका महत्व बाखूबी समझते हुए सम्मानित योद्धाओं को शौर्य के लिए प्राप्त होने वाले धन में बढ़ोत्तरी कर चुकी है। जिसके तहत अब परमवीर चक्र विजेता को पचास लाख की धनराशि से सम्मानित किया जाएगा। महावीर एवं कीर्ति चक्र विजेताओं को 35 लाख, वीर एवं शौर्य चक्र विजेताओं को पच्चीस लाख और गेलेन्ट्री मेडल विजेताओं को पन्द्रह लाख की धनराशि देकर सम्मानित किया जा रहा है। राज्य सरकार इस उद्देश्य पर काम कर रही है कि 2025 तक राज्य प्रगति का वह सोपान प्राप्त कर ले। जहाँ पहुँच कर राज्य के लोगों को सन्तुष्टि का अहसास हो। 2025 में राज्य अपनी रजत जयंती मना रहा होगा और राज्य के लोग इस गौरवशाली अवसर पर स्वयं को धन्य समझेंगे। इसी लक्ष्य के लिए सरकार केन्द्र सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर तमाम योजनाओं पर जुट कर काम कर रही है।

 

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