देहरादून लक्ष्मण सिद्ध में उमड़े श्रद्धालु

नेशनल वार्ता ब्यूरो

देहरादून की लक्ष्मण सिद्ध पीठ
देहरादून मे हैं चार सिद्ध पीठ
देहरादून और डोईवाला के बीचोंबीच विराजमान हैं श्रीराम के राम भक्त छोटे भाई लक्ष्मण। शिवालिक पर्वत माला के हरे-हरे ऊँचे साल के पेड़ों की छाया में शोभायमान यह मन्दिर श्री लक्ष्मण के नाम से जाना जाता है। हालाँकि, यहाँ महादेव का मंदिर भी है। यह पावन स्थल धर्माटन का केन्द्र है। कुदरती सुन्दरता इस धर्म क्षेत्र की शोभा में चार चाँद लगा देती है। देहरादून से हरिद्वार और ऋषिकेश जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर शिवालिक पर्वत माला पर स्थित यह सिद्ध स्थल पूरे जनपद देहरादून के लोगों की आस्था का केन्द्र है। वैसे तो यहाँ साल भर रोज-रोज पर्यटकों और धर्माटकों का आना जाना लगा रहता है किन्तु इतवार के दिन यहाँ श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। अब तो बाकायदा पर्यटन की बसें भी इस पावन स्थल पर देखी जा सकती हैं जो इस बात का प्रमाण हैं कि लक्ष्मण सिद्ध की पावन स्थली मशहूर होती जा रही है। बीते इतवार लक्ष्मण सिद्ध में श्रद्धालुओं की भीड़ चौकाने वाली थी। एक ओर श्रद्धालु भण्डारा भोज का आनन्द उठा रहे थे तो दूसरी ओर मंदिरों की घंटियाँ घनघना रही थीं। चारो ओर बंदरों की उछल कूद से वातावरण की धार्मिकता बढ़ जाती है। साल के पेड़ों की ठण्डी-ठण्डी हवा गरमी के थपेड़ों से पर्यटकों और धर्माटकों को राहत देती है। यह धर्मस्थली श्रीराम के समर्पित छोटे भाई श्री लक्ष्मण के नाम का उत्तराखण्ड में दूसरा पावन स्थल है। इसके अलावा पवित्र हेमकुण्ड साहिब की झील के किनारे भी श्री लक्ष्मण का पावन मंदिर स्थित है जो कि बेहद सूक्ष्म रूप में है और इसका विकास किया जाना चाहिए। धर्माटन के लिए भी यह बहुत जरूरी है। लक्ष्मण सिद्ध के अलावा देहरादून में कालू सिद्ध, मानक सिद्ध और माण्डू सिद्ध को मिलाकर चार सिद्ध धाम विराजमान हैं। राज्य सरकार इन चारों धामों को जोड़ कर चार धाम सर्किट बना सकती है और पर्यटन के साथ-साथ धर्माटन को खूब बढ़ावा दे सकती है। इसके लिए सरकार को इन चारों सिद्ध पीठों का सौन्दर्यीकरण करना होगा। इसके साथ-साथ अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होंगी। उत्तराखण्ड की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए ऐसे प्रयासों में देरी नहीं की जानी चाहिए। चिराग तले अँधेरा वाली कहावत से सरकार को बचना चाहिए। हालाँकि, सरकार ने लच्छी वाला नेचुरल पार्क का विकास करके सराहनीय काम किया है। किन्तु लच्छीवाला और लक्ष्मण सिद्ध के बीच मात्र पाँच किमी का फासला है । ऐसे में लक्ष्मण सिद्ध की उपेक्षा श्रद्धालुओं को खटक रही है। -वीरेन्द्र देव गौड, पत्रकार, देहरादून

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