वाराणसी जिला जज महोदय छिपाओ नहीं दिखाओ

मुगलिया सल्तनत के दाग मिटाओ
वीरेन्द्र देव गौड़/सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला
सुना है आज वाराणसी के जिला जज लोगों को फिल्म दिखाने वाले हैं। यह ऐसी फिल्म होगी जिसमें सच होगा सच के सिवाय कुछ नहीं। जब सच ही सच है तो दिखाने में देरी क्यों। सुल्तानों और मुगलों के गुनाहों को छिपाने में इतनी रूचि क्यों । अगर ऐसा ही है तो इतिहास की पुस्तकों को कूडे़दान में फेंकवा दीजिए और कोर्स से इतिहास को हटवा दीजिए। क्या जरूरत है ऐसा इतिहास को पढ़ाने की जिसमें सच हो। झूठा इतिहास पढ़ाइए और पीढ़ियों को गँवार बनाए रखिए। आने वाली पीढ़ियों को गुलाम मानसिकता से भर दीजिए। आने वाली पीढ़ियों को ऐसा सच मत दिखाइए जो उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ दे। लगातार ऐसा करते रहिए जो उन्हें उनकी जड़ों से तोड़ दे। 72 सालों से यही तो कर रहे हो। मुसलमान कह रहे हैं सच मत दिखाओ। सच मत बताओ। सच को ढाँपे रखो। सच भारतीयों को स्वाभिमानी बना देगा। उन्हें पराक्रमी बना देगा। उन्हें गुलाम मानसिकता से मुक्त कर देगा। इसलिए केवल और केवल पूजा स्थलों को लेकर बनाया गया 1991 का कानून ही संविधान है। एनआरसी और सीए का कानून वाहियात हैं। कृषि को लेकर बने तीन कानून नालायक थे। केवल नरसिम्हा राव कांग्रेस सरकार द्वारा बनाया गया कानून ही संविधान है। बाकी सब कूड़ा करकट है। इसलिए वाराणसी के जिला जल महोदय ज्ञानवापी परिसर का सच लोगों के सामने मत आने दो। जिहादी मानसिकता के मुसलमानों को दुःख होगा। जिहाद को बढ़ावा देने वाली कांग्रेस, सपा, बसपा, आप, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, डीएमके, कम्युनिस्ट पार्टी माक्सवादी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया सहित तमाम अन्य पार्टियों को दुःख होगा। केवल और केवल भाजपा को सुख होगा। क्योंकि पूरे देश में भाजपा ही कम्युनल पार्टी है बाकी सब तो सैक्युलर पार्टियाँ हैं। जो जिहाद को बढ़ावा दे वे सैक्युलर हैं। संविधान भी उन्हीं का साथ दे रहा है। बड़ी-बड़ी अदालतें भी उन्हीं के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। इनके लिए उनका दुःख तो दुःख है। देश भक्त भारतीयों का दुःख कोई मायने नहीं रखता। क्योंकि ये भारतीय चाहते हैं सभी बड़ी मस्जिदों का सम्मान के साथ सर्वेक्षण हो और वास्तविकता सामने आ जाए। सच को जानने का अधिकार सबसे बड़ा मूल अधिकार होता है। इससे बड़ा मानवाधिकार भी कोई नहीं होता। लेकिन हमारी अदालतंे यह समझने को तैयार नहीं हैं। आज का सबसे बड़ा सच यही है कि मंदिरों की छाती पर तनी मस्जिदों को गिरा दिया जाए। जिहादी सुल्तानों और जिहादी मुगलों के रक्तरंजित इतिहास को मिटा दिया जाए।

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