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जेल में बोली हनीप्रीत, मुझे मेरे पापा से मिलवा दो

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जींद । बताया जा रहा है कि हनीप्रीत राम रहीम से मिलने के लिए अब भी जिद पर अड़ी है। जेल में लाए जाने के बाद से वह कह रही है कि उसके पापा की पीठ में दर्द होगा। उसने काफी दिनों से उन्हें नहीं देखा है। इसलिए उसे उसके पापा से मिला दिया जाए। हालांकि अधिकारियों ने हनीप्रीत की बातों को तवज्जो नहीं दी।
माइग्रेन की शिकायत-डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत ने माइग्रेन की शिकायत बताई है। इसके बाद डॉक्टरों ने उसका चेकअप किया। अंबाला सिविल अस्पताल के पैनल में से एक डॉ. अर्पिता गर्ग का कहना है कि रात में जेल में लाए जाने के बाद हनीप्रीत ने माइग्रेन और बॉडी पेन की समस्या बताई। इसके बाद हमारे पैनल ने दो घंटे से भी ज्यादा वक्त लगाकर उसका चेकअप किया। डीएसपी प्रमोद कुमार के मुताबिक डॉक्टर हनीप्रीत को स्वस्थ और सामान्य बता रहे हैं। फिर भी हनीप्रीत के लिए कुछ टेस्ट लिखे गए हैं, जिन्हें करने के बाद उनकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 23 अक्तूबर तक ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजे जाने के बाद शनिवार को जेल में हनीप्रीत का दूसरा दिन है। लग्जरी जीवन जीने की शौकीन हनीप्रीत को अंबाला की सेंट्रल जेल प्रशासन ने सोने के लिए एक दरी और चादर दी है। बीती रात वो मच्छरों से परेशान करवटें बदलती रही। सुबह हनीप्रीत और सुखदीप कौर दोनों को बैरक से बाहर निकाला गया तो आंखों में नींद और शरीर पर आलस साफ दिखाई दे रहा था। जब उसे जेल लाया गया तो उसकी पल्स रेट बढ़ी हुई थी। हनीप्रीत को रात के खाने में आलू की सब्जी व रोटी दी गई, जिनमें से उसने एक-दो निवाला ही खाया।  जेल सूत्रों के मुताबिक हनीप्रीत को हाई सिक्योरिटी महिला सेल 11 में बाकी महिला बंदियों से अलग रखा गया है। अंडर ट्रायल होने की वजह से उसे जेल की यूनिफॉर्म नहीं दी गई है। जेल के सूत्रों के मुताबिक हनीप्रीत और सुखदीप के साथ महिला नंबरदार को सुरक्षा में रखा गया है। बताया जा रहा है कि हनीप्रीत व सुखदीप किसी से बात नहीं कर रही है। दूसरे कैदियों को हुई दिक्कत-उधर, हनीप्रीत को यहां लाए जाने पर अन्य कैदियों को समस्या होने लगी है। जेल से जमानत पर छूटे बेटे को लेने आए मदन लाल की मानें तो हनीप्रीत के चक्कर में अंबाला जेल प्रशासन ये भूल गया कि जेल के बाहर कुछ ऐसी महिलाएं-पुरुष भी खड़े हैं, जो अपनो की जमानत होने की बाद उन्हें लेने अंबाला जेल आए। उन्हें जेल के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ा।

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