कारगिल विजय दिवस का उल्लास

-नेशनल वार्ता ब्यूरो-

आज 26 जुलाई के दिन भारतीय वीरों ने कारगिल क्षेत्र पर विजय प्राप्त कर द्रास में तिरंगा फहराया था। टाइगर हिल पर यह तिरंगा अब भी लहरा रहा है। भारतीय वीरों ने कारगिल की चोटियों पर चोरी से आ धमके पाकिस्तानियों को धूल चटा दी थी। जब कि पाकिस्तानी ऊँची चोटियों पर अड्डे बना चुके थे। वे पूरी तैयारी के साथ आए थे ताकि कारगिल क्षेत्र को अपने कब्जे में कर सकें। कारगिल क्षेत्र की इन ऊँची चोटियों पर भारतीय फौजों का पहुँच पाना शूरवीरता से ही संभव हुआ। इस शूरवीरता में हमारे 527 रणबाँकुरे वीरगति को प्राप्त हुए लेकिन किसी ने भी कदम पीछे नहीं किए। भारतीय वीरों ने वीरता की अदभुत मिसाल कायम की। वे अंतिम साँस तक लड़ते रहे। कई अफसरों ने भी वीरगति का आलिंगन किया। माँ भारती के भाल को झुकने नहीं दिया। खुद मिट गए परन्तु भारत के नाम को ऊँचा कर गए। दुश्मन को लगा था कि वे ऊँची चोटियों पर कब्जा किए हुए थे और वे भारतीयों को छठी का दूध याद दिला देंगे। लेकिन हुआ ठीक उल्टा। भारत के शूरवीरों ने 60 दिन के अन्दर पाकिस्तानी फौज को छठी का दूध याद दिला दिया। पाकिस्तान की यह कायराना हरकत भारत को दुनियाभर में बताई जानी चाहिए थी।  भारत ने ऐसा किया या नहीं किया पता नहीं। पाकिस्तान कई बार हमारी फौजों से अपने दाँत खट्टे करा चुका है। इसीलिए वह अब सीधी लड़ाई कभी नहीं लड़ेगा। तब भी नहीं जब चीन जैसा हमारा दुश्मन उसका साथ दे। इसीलिए उसने जिहाद का रास्ता अपनाया है। जिहादी आतंक के जरिए वह भारत को पस्त कर देना चाहता है। उसे भारत की बेमिसाल वीरता अभी भी समझ में नहीं आ रही है। बहरहाल, भारत को इस पड़ोसी समस्या का रास्ता तो तलाशना ही होगा। कारगिल के शूरवीरों को हमारा कोटि-कोटि नमन्।

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