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क्या जोशीमठ के बेघर लोगों का पुनर्वास होगा ?

सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला (वीरेन्द्र देव गौड़) एवं एम0 एस0 चौहान
बड़ा सवाल यह है कि कया जोशीमठ में बेघर हो चुके लोगों को स्थायी समाधान मिलेगा। राज्य सरकार मासिक किराया देने को तैयार है। लेकिन यह तो अस्थाई इलाज है। अब जब कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी हर संभव सहायता का आश्वासन दे दिया है तो क्या जोशीमठ के पीड़ितों को जल्दी ही स्थाई समाधान मिल पाएगा। क्योंकि जिन मकानों, सड़कों और गलियों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं उनका कोई इलाज नहीं। ऐसे स्थल पर रहना खतरे से खाली नहीं। राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई की लेकिन समाधान ऐसा होना चाहिए कि लोगोें का सरकार में विश्वास बढे। उत्तराखण्ड में देश के अन्य भागों के साथ-साथ विकास के बड़े-बड़े काम हो रहे हैं। इन विकास कार्यों को रोका नहीं जा सकता है। राज्य सरकार को पूरे राज्य के लोगोें को विश्वास में लेना होगा कि ऐसी कोई आपदा आने की आहट पर ही लोेगों को समाधान दिया जा सकता है। ऐसा होने पर ही लोगों को सरकार पर विश्वास हो पाएगा। राज्य सरकार ऐसे सभी आशंकित स्थलों की पड़ताल कर रही है। यदि यह सही है तो इससे बढ़िया बात कुछ नहीं हो सकती। सरकार को ऐसे संवेदनशील रिहायशी क्षेत्रों की लिस्ट बना लेनी चाहिए। पूरी तैयारी रखनी चाहिए कि जोशीमठ जैसी त्रासदी की शुरूआत में ही समाधान किया जा सके। ऐसा करना बहुत आवश्यक है। पलायन पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को चौकन्ना रहना पड़ेगा। जोशीमठ जैसी आपदा अन्यत्र भी सर उठा सकती है। इस दुःखद अनुभव का लाभ उठाया जाना चाहिए। लोगों ने रैली निकाल कर सरकार से सुरक्षा की मांग की थी। रैली की नौबत नहीं आने देनी चाहिए थी। बहरहाल, अब ऐसा नहीं होना चाहिए। सरकार के पास अलग से आपदा प्रबंधन विभाग है। हालाँकि, यह विभाग अन्य विभागों पर आश्रित है। फिर भी आपदा प्रबंधन बहुत चुस्त दुरूस्त होना चाहिए। आपदा प्रबंधन के लिए अलग से कुछ हेलीकॉप्टरों की व्यवस्था होनी चाहिए। जिला प्रशासन को आपदा प्रबंधन के लिए और अधिक प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। उत्तराखण्ड की भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देनजर ऐसा करना बहुत आवश्यक है।

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