यात्रियों से भरी बस खाई में समाई, छब्बीस की मौत

उत्तरकाशी (नेशनल वार्ता न्यूज़) । उत्तराखण्ड चार धाम यात्रा पर आए मध्य प्रदेश के पन्ना से श्रद्धालुओं की बस यमुनोत्री के रास्ते पर एक गहरी खाईं में समा गई जिसमें करीब 26 श्रद्धालुओं की मौत हुई साथ में चार के घायल होने की खबर है। बस द्वारा श्रद्धालु यमुनोत्री धाम के दर्शनों के लिए जा रहे थे। हादसे में 26 की मोत हो गई, जबकि चार घायलों का डामटा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार दिया गया। चारों को देर रात देहरादून रेफर कर दिया गया। दुर्घटना की प्रांरभिक वजह चालक को नींद लगने की वजह बताया जा रहा है। बताया गया कि दुर्धटनाग्रस्त बस का बिना रुके यह तीसरा ट्रिप था। नियमतः एक ट्रिप पूरा करने के बाद बस और चालक दोनों को विश्राम दिया जाना होता है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को घटनास्थल पर जाएंगे। शिवराज देर रात देहरादून पहुंच गए थे।
रविवार शाम करीब सवा सात बजे यमुनोत्री धाम से 70 किलोमीटर पहले डामटा के पास यह हादसा हुआ। मप्र के पन्ना से चारधाम यात्रा के लिए आए 28 श्रद्धालु सुबह 10 बजे हरिद्वार से यातायात पर्यटन एवं विकास सहकारी संघ लिमिटेड कंपनी की बस द्वारा यमुनोत्री धाम के लिए चले। चालक और परिचालक समेत 30 यात्री इसमें सवार थे। इनमें 14 महिलाएं थी। डामटा के पास बस अनियंत्रित होकर लगभग 400 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। उस वक्त आठ से दस वाहनों का काफिला वहाँ से गुजर रहा था, इनमें दो वाहन इस बस में सवार श्रद्धालुओं के साथ यात्रा पर आए श्रद्धालुओं के भी थे।
हादसे की सूचना पर डामटा पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों ने घटनास्थल पहुँचकर स्थनीय नागरिकों की मदद से रेस्क्यू शुरू किया। खाई में कुछ लोग दर्द से कराह रहे थे, कुछ बेसुध पड़े थे। रेस्क्यू टीम ने घायलों को डामटा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया। हादसे में 26 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। बडकोट की एसडीएम शालिनी नेगी ने फिलहाल 24 शव निकाले जाने की पुष्टि की। जिस जगह दुर्घटना हुई, वहाँ सड़क काफी चौड़ी है। आशंका जताई जा रही है कि चालक को झपकी आने की वजह से वह बस पर नियंत्रण खो बैठा होगा। कई बार ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं जिनमें चालक की जल्दबाजी घटना का कारण बनी हैं, क्योंकि आराम और नींद पूरी किए बिना बराबर गाड़ी चलाते रहते हैं चालक जिस कारण दुर्घटनाएं होना स्वाभाविक है। चालकों पर मालिकों की ओर से इतना दबाव होता है कि दूसरों की जान जोखिम में डाल देते हैं। परिवहन विभाग को ऐसे नियम बनाने होंगे जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके और श्रद्धालुओं की सुरक्षित यात्रा हो सके।

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