उत्तराखण्ड का नतीजा समय के पलड़ों में

उत्तराखण्ड में भी महिलाएं निर्णायक
नेशनल वार्ता ब्यूरो
उत्तराखण्ड में एक ओर कांग्रेस के वफादार सेनापति हरीश रावत जीत का भरोसा जता रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ महीने के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भाजपा की वापसी तय मान रहे हैं। दोनो नेता अपना-अपना दम भर रहे हैं और राजतिलक की तैयारी कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में महिलाओं ने भाजपा के पक्ष में अपना रूझान दिखाया है। उत्तराखण्ड में भी भाजपा की जीत महिलाओं पर ही निर्भर है। बल्कि उत्तराखण्ड में अगर भाजपा जीती तो यह महिलाओं का करिश्मा ही माना जाएगा। क्योंकि राशन की दुकानों पर महिलाएं ही अधिक दिखाई देती हैं। गढ़वाल की 30 सीटों पर काँटे का मुकाबला बताया जाता रहा है। कुमाऊँ में भी इसी तरह का हिसाब किताब बताया गया। ऊधमसिंह नगर, देहरादून और जनपद हरिद्वार में बसपा के थोड़ा बहुत असर को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। झाडू वाले काग्रेस के वोटर बताए जा रहे हैं। यानी झाडू वालों को कांग्रेस के परम्परागत वोट पड़ेंगे। बसपा को पड़ने वाला वोट भी ज्यादातर कांग्रेस को नुकसान पहुँचाएगा। ऐसे हालात में भाजपा बढ़त बना सकती है। हालाँकि, उत्तराखण्ड में दावे के साथ किसी नतीजे पर पहुँचना बहुत मुश्किल है। क्योंकि अधिकतर मतदाता खामोश दिखाई दे रहे हैं। ये चुप रहने वाले मतदाता अगर भाजपा के पाले में गए हैं तो भाजपा जीत का जादुई आँकड़ा पार कर सकती है। कांग्रेस के अरमानों पर तुषारापात हो सकता है। उधर पंजाब में झाडू वाले जीत की ओर अग्रसर दिखाई दे रहे हैं। इन झाडू वालों के मसीहा केजरीवाल ने तो दिल्ली बोर्डर पर चले लम्बे आन्दोलन के दौरान जम कर चुनाव की तैयारी कर ली थी। इन्होंने तो तभी अपना पूरा होमवर्क कर लिया था। इन्हें तो बस चुनाव की तारीखों के ऐलान का इंतजार था। -सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला (वीरेन्द्र देव), पत्रकार, देहरादून।

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