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समान नागरिक संहिता की प्रतीक्षा

-नेशनल वार्ता ब्यूरो-

हम समान नागरिक संहिता की प्रतीक्षा में नजरें गड़ाए बैठे हैं। पता नहीं कब हमारे मन की यह इच्छा पूरी होगी। जब तिरंगा एक है, संविधान एक है तो नागरिकों में भेद क्यों। संविधान की दुहाई देने वालों एक देश में नागरिकों के लिए अलग-अलग कानून क्यों। क्या, इस कानूनी अलगाववाद से भाईचारा बढे़गा। सनातन् धर्म हो या कोई मजहब, संविधान के लिए सब बराबर होने चाहिएं। हे, उत्तराखण्ड की सरकार समान नागरिक संहिता लाओ। भाईचारा बढ़ाओ। राज्य में शरियत प्रेम वालों को जगाओ। उन्हें समझाओ कि तुम भी हिन्दू की तरह इंसान बनो। शरियत की हैवानियत से उत्तराखण्ड का पिंड छुड़ाओ। ज्यादा देर न लगाओ। गोवा में तो समान नागरिक संहिता पहले से ही है। वहाँ तो कोई कयामत नहीं आई। फिर, कयामत की धमकी क्यों दी जा रही है। अरे, धमकी वाले मजहब इंसानियत सीखो। गला काटने की आदत से बाज आओ। यह शौक ठीक नहीं है। इस शौक को तिलांजलि दे दो। अपनी मर्जी से खुद आगे आओ और बोलो हमें समान नागरिक संहिता चाहिए। तब तो हम जाने की तुम्हारे अंदर मेल-जोल की भावना है। गंगा-जमुनी संस्कृति की भावना है। वैसे भी, गंगा-जमुनी संस्कृति महज एक जुमला है। यह जुमला एकदम वाहियात है। अगर हिन्दुओं से वाकई मेलजोल बढ़ाना है तो समान नागरिक संहिता तुम्हारी परीक्षा है। खैर, हमें तुम्हारी असलियत पता है। तुम्हारे मुँह में अमन और दिल में जिहादी-चमन रहता है। हम, सचमुच बहुत सहनशक्ति वाले लोग हैं। वैसे, यह सहनशक्ति अब नासमझी में बदल चुकी है। हमारी यह नासमझी हमें कायर बना चुकी है। जिसका आप लोग भरपूर फायदा उठा रहे हो। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री महाराज जल्दी से जल्दी समान नागरिक संहिता लाओ। देश को बचाओ। देश को केवल कानून से ही नहीं बचा पाएंगे। हमें हर हिन्दू को जिहाद और जिहादी आतंक का अर्थ समझाना होगा। हमें समझाना होगा देवबंद में क्या होता है। असलियत समझाने से जागृति आएगी। समान नागरिक संहिता से भी जागृति आएगी। कृपया, यह जागृति लाइए। सोए हिन्दू की आँखें खोलिए। -वीरेन्द्र देव गौड़, पत्रकार, देहरादून

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