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20 हजार की आबादी के सूखे हलक

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अल्मोड़ा (संवाददाता)। गगास नदी से हालिया बनी खिरोघाटी ग्राम समूह पंपिंग पेयजल योजना जवाब दे गई है। नतीजा योजना के ठप होने से विकासखंड के 21 ग्राम पंचायतों की करीब 20 हजार की आबादी त्राहि त्राहि कर उठी है। दूसरी ओर पेयजल संकट से निपटने को विभाग रात दिन एक करने का दावा तो कर रहा, मगर बीते दस दिनों से योजना में आया फॉल्ट नहीं तलाशा जा सका है। सड़क निर्माण का मलबा लाइन पर गिर जाने को समस्या की बड़ी वजह बताया जा रहा। ब्लॉक के दूरस्थ गावों की पेयजल समस्या के समाधान को वर्ष 2007-08 में गगास नदी से करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से स्वैप मोड में योजना स्वीकृत हुई थी। योजना में मुख्य पाइप लाइन बिछाने का कार्य पेयजल निगम ने वर्ष 2010-11 में पूरा किया। पांच साल बाद 21 ग्राम पंचायतों को जलापूर्ति शुरू कर दी गई थी। मगर बीते दस दिनों से योजना दम तोड़ गई है। पाच दिनों से फॉल्ट ढूंढने में नाकाम विभाग ने अब पंप फुंक जाने के डर से पूरी योजना ही बंद कर डाली है। कई क्षेत्रों में लोग हैंडपंप से जगाड़ कर रहे पर उससे भी गंदा पानी मिल रहा। प्राकृतिक स्त्रोतों से भी जैसे तैसे जुगाड़ कर रहे, लेकिन अधिसंख्य स्रोत सूखने से हालात दिन ब दिन बद्तर होते जा रहे। ऐसे में बूंद बूंद को तरस रहे ग्रामीणों में गुस्सा भी बढऩे लगा है। खलना, तिपौला, बड़ेत, कूना, धन्यारी, द्योलाढग़ूठ, चमीनी, कुंस्यारी, असगोली, छतगुल्ला, बसेरा, तल्ली व मल्ली कहाली, बूंगा, कुई, मैनोली, छतीना, पिनोली, मल्ली मिरई, तल्ली मिरई आदि। खिरोघाटी पेयजल योजना पिछले चार-पाच दिन से बंद कर दी गई है। निर्माणाधीन खलना-तिपौला मोटरमार्ग का मलबा योजना पर गिर गया है। इससे फॉल्ट ढूंढने में काफी दिक्कत आ रही है। सोमवार को लोनिवि अधिकारियों के साथ मलबा हटाने का काम शुरू किया गया है। जल्द पता लग जाएगा कि लाइन कहां पर टूटी है। मरम्मत होने के बाद ही जलापूर्ति सुचारु हो सकेगी।

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