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इन्द्रदेवता ने मालदेवता पर गुस्सा निकाला

-नेशनल वार्ता ब्यूरो-

इन्द्रदेवता दो दिन पहले अचानक भयंकर राक्षस बन कर मालदेवता पर टूट पड़े। मालदेवता देहरादून के आगे रायपुर से 7 किमी की दूरी पर है। मालदेवता से सौंग नदी निकलती है। हालाँकि, यह नदी भी अब बरसाती बनती जा रही है। फिर भी इस बरसाती नदी ने अपना रौद्ररूप दिखाया। बादल फटने से इस क्षेत्र के दो गाँव तहस नहस हो गए। लगभग एक दर्जन लोग गायब बताए जा रहे हैं। कुछ लोग घायल बताए जा रहे हैं। बादल फटने के पीछे ना तो सरकार का हाथ है और ना गाँव वालों का। यह कुदरती कारनामा होता है। बादल अमूमन ऊँचे पहाड़ियों से बनी तंग घाटियों में फटते हैं। जिस पानी को दो घंटे में बरसना होता है वह कुछ सेकेंडों में नीचे गिरता है। प्रचंड बाढ़ का रूप ले लोता है। यह बाढ़ विनाशकारी होती है। बहुत अधिक पानी को संभाल पाना मुश्किल काम होता है। इसीलिए नदियों और बरसाती नदियों के किनारे के गाँव इस आपदा की भेंट चढ़ जाते हैं। देहरादून ही नहीं बल्कि पूरे उत्तराखण्ड के लोग इस भयानक विपदा से डरे सहमे हुए हैं। ऐसी आपदाओं का स्थाई समाधान तो यही होता है कि ऐसी नदियों और नालों के पास लोगों को बसने ना दिया जाए। विपदा आने के बाद देहरादून का प्रशासन तेजी से एक्शन में आया और राहत और बचाव का काम सम्पन्न किया गया। टपकेश्वर महादेव मंदिर भी बाढ़ की चपेट में आ गया। हालाँकि यह मंदिर सौंग नदी से दूर है। लेकिन उसी दिन यहाँ भी आपदा आई। हालाँकि यहाँ जान और माल का नुकसान नहीं हुआ। टपकेश्वर महादेव की छोटी सी नदी भी अब बरसाती नाले का रूप लेने जा रही है। टपकेश्वर महादेव मंदिर के चारो ओर मकानों के बनने का सिलसिला इसके लिए जिम्मेदार है। पर्यावरण का ध्यान नहीं रखा जाएगा और बसासत पर नियंत्रण नहीं रखा जाएगा तो धीरे-धीरे देहरादून की सभी छोटी नदियाँ नाले बन जाएंगी और पर्यटन चौपट हो जाएगा। सरकार को कुछ करना चाहिए।

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