देहरादून (संवाददाता)। केंद्र सरकार लगातार कौशल विकास पर जोर दे रही है, वहीं उत्तराखंड में अभी तक इसकी रफ्तार बेहद धीमी है। इसे देखते हुए राज्य सरकार युवाओं के कौशल विकास के मद्देनजर प्रदेशभर के 350 प्रशिक्षण केंद्रों को लेकर खासी सजग हो गई है। कौशल विकास एवं सेवायोजन निदेशालय ने इस कड़ी में सभी जिलों के डीएम को इन प्रशिक्षण केंद्रों की जांच के निर्देश दिए हैं। विभागीय और डीएम की रिपोर्ट मिलने के बाद ही इन प्रशिक्षण केंद्रों के संचालकों को भुगतान किया जाएगा। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और उत्तराखंड कौशल विकास योजना के तहत खुले कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रो को लेकर हाल में आई शिकायतों को देखते हुए कौशल विकास एवं सेवायोजन मंत्री डॉ.रावत ने इसमें गड़बड़ी की आशंका जताई थी। इसके बाद उत्तराखंड कौशल विकास योजना की नोडल अधिकारी चंद्रकाता रावत ने सभी जिलों के जिला कौशल विकास एवं सेवायोजन अधिकारियों को इन केंद्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। कुछेक स्थानों पर इसमें गड़बड़ी तो कहीं प्रशिक्षण केंद्र सबलेट करने की बातें सामने आई। अब कौशल विकास के मामले में सरकार कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है। इसके तहत कौशल विकास एवं सेवायोजन अधिकारी तो कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों की जांच पड़ताल में जुटे ही हैं, अब जिलाधिकारियों को भी यह जिम्मेदारी सौंप दी गई है। कौशल विकास एवं सेवायोजन मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत की ओर से इस संबंध में सभी जिलों के डीएम को पत्र भेजे जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जिलाधिकारियों को उनके जिलों में कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों से संबंधित सूची भेजी जा रही है। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन केंद्रों की जांच कर सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि कौशल विकास विभाग और डीएम की रिपोर्ट का मिलान करने के बाद ही यह माना जाएगा कि संबंधित केंद्र वास्तव में संचालित हो रहे हैं। इसके बाद ही संचालकों को भुगतान किया जाएगा। यदि कहीं किसी प्रकार की अनियमितता की बात सामने आई तो कड़ी से कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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