Karwa Chauth 2023: आज सुहागिनों का पर्व करवा चौथ है। सुहागिनों द्वारा पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाना वाले ये पर्व हिंदू धर्म में बेहद खास माना गया है। करवा चौथ के व्रत में सुहागिन महिलाएं सुबह से शाम तक उपवास करती हैं। दिनभर निर्जला व्रत रखते हुए शाम को करवा माता की पूजा करती हैं, आरती करती हैं और कहानी सुनती हैं। शाम को चंद्रमा को देखती हैं। फिर व्रत को खोलते हुए अपने पति से जल लेकर चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं। इसके बाद सभी सुहागिन महिलाएं अपने सास-ससुर और बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हुए करवा चौथ का पारण करती हैं। इस व्रत में पूजा के शुभ मुहूर्त का भी विशेष महत्व माना गया है। आइए जानते हैं करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और चंद्रोदय का समय…
शुभ मुहूर्त और सूर्यास्त का समय
ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि 1 नवंबर को करवा चौथ व्रत होगा। चतुर्थी तिथि 31 अक्तूबर रात 9:30 बजे से ही शुरू हो जाएगी जो 1 नवंबर को सूर्योदय से रात 9:20 तक रहेगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग व शिव राज योग सुबह से पूरे दिन रहेंगे। चंद्रोदय का समय रात 8:38 बजे हैं। ज्योतिषाचार्य अनीता पाराशर ने बताया कि सरगी लेने का सर्वोत्तम समय सुबह तीन बजे से चार बजे के मध्य है।
ऐसे करें पूजा
करवा चौथ पर सर्वार्थ सिद्धि और शिव राज योग होने से पूजा सभी को लाभ देगी। गणपति, मां पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमाओं को पूजन के लिए पीली शुद्ध मिट्टी से बनाया जाता है। मूर्तियों को लकड़ी की एक चौकी पर स्थापित करके गंगाजल से शुद्ध करें। माता पार्वती को लाल चुनरी ओढ़ाकर सजाओ। शिव और गणेशजी को पुष्प, वस्त्र और माला से सजाओ। करवे में जल रखें, घी का सुंदर दीपक रखें और भगवान के सामने धूप जलाएं। फिर भगवान को पूड़ी, पूए, लड्डू, मीठी मठरी, नैवेद्य, मेवा, आदि भोग लगाकर गौर पार्वती की आरती करें और उनसे अपने पति की दीर्घायु और स्वस्थता की प्रार्थना करें। रात में चंद्र दर्शन, पूजन कर जल अर्पित करके व्रत पूर्ण होता है।
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