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बाजारों से चीनी राखियां गायब

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देहरादून। भारत-चीन विवाद के बीच कई शहरों में बाजारों से चीनी राखियां गायब हो गई हैं। खरीददार देशी राखियों को खरीदाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ऋषिनगरी का बाजार स्वदेशी राखियों से सज गया है। बाजार से चीनी राखियां गायब सी हो गई हैं। तीन से सत्तर रूपये कीमत तक की रंगबिरंगी राखियां बाजार में उपलब्ध है। राखियां खरीदने के लिये लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। बीते वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष राखियों की कीमतों में 10 से 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। रक्षाबंधन पर्व को लेकर ऋषिकेश का बाजार राखियों से पटने लगा है। बहनों की कलाई सजाने के लिए राखियां खरीदने व भेजने में भाई-बहनों में खासा उत्साह है। पर्व के लिए कपड़े, गिफ्ट आइटम की दुकानें भी सज गई हैं।
स्वदेशी-रेशमी राखियों से सजा बाजार: रक्षाबंधन का त्योहार जैसे-जैसे करीब आ रहा है बाजार सज रहा है। बच्चों से लेकर बड़ों के लिए अनेक प्रकार की राखियां बाजार में उपलब्ध है। शहर के रेलवे रोड, हरिद्वार रोड, सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में दुकानें लगी है। स्वदेशी के साथ महिलाओं द्वारा रेशमी, डोरी वाल डायमंड फैशनेबल राखियां ज्यादा पसंद की जा रही है। बच्चों के लिए मोटू-पतलू, पबजी, मोरवाली आदि राखियां बाजार में हैं। कोरोना वायरस के चलते इस बार राखियों के बाजार में असर दिख रहा है।
बीते वर्ष के मुकाबले इस बार 70 प्रतिशत तक ही राखियों का कारोबार होने की उम्मीद हैं। वहीं चाईनीज राखियां भी बाजार से पूरी तरह से नदारद हैं। घाट रोड पर राखी की दुकान लगाने वाले सतीश कुमार ने बताया बीते साल की अपेक्षा इस साल कम राखियां बिक रही है। 

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