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कोविड-19 के कारण अपनी शिक्षा को प्रभावित न होने दें-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

-विद्यालयों को ऑनलाइन कक्षाओं के आयोजन की दिशा में व्यापक रणनीति तथा मूल्यांकन प्रणाली को अपनाने की आवश्यकता

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देहरादून/ ऋषिकेश (दीपक राणा) । परमाथ निकेतन  के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण वैश्विक स्तर पर जो उथल-पुथल हुई इस पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि, कोविड – 19 ने बच्चों की शिक्षा को भी अत्यधिक प्रभावित किया है। शिक्षा, किसी भी व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिस देश में बच्चों को सही और उपयुक्त शिक्षा मिल रही है अर्थात उस देश में योग्य और कुशल मानव संसाधन का विकास सम्भव है। शिक्षित होकर बच्चे नये-नये शोध के माध्यम से देश की मदद करते है और राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान देते हैं। शिक्षा, बच्चों के व्यक्तित्व, आचरण और मूल्यों को निखारती है तथा उन्हें एक श्रेष्ठ नागरिक बनने में मदद करती है।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण वैश्विक स्तर की व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर हुआ है। साथ ही शिक्षा का क्षेत्र भी काफी प्रभावित हुआ है। ‘संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन’ द्वारा जारी की जाने वाली ‘वैश्विक शिक्षा निगरानी’ रिपोर्ट- 2020 के अनुसार, कोविड-19 महामारी के कारण वैश्विक शिक्षा अंतराल में वृद्धि हुई है। इस दौरान  निम्न तथा निम्न-मध्यम-आय वाले लगभग 40 प्रतिशत देशों में गरीब, भाषाई अल्पसंख्यक और विकलांग लोगों को शिक्षा संबंधी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मार्च और अप्रैल, 2020 से विश्व में अधिकांश विद्यालय बंद रहे, इस कारण विश्व के लगभग 91 प्रतिशत छात्र स्कूल नहीं जा पाए।

इस रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान विश्व में दूरस्थ शिक्षा प्रणाली और उपायों को अपनाया गया जो कि वास्तव में कक्षा आधारित प्रणालियों की तुलना में कम प्रभावी रही है। रिपोर्ट के अनुसार, निम्न-आय वाले 55 प्रतिशत निम्न-मध्यम-आय वाले 73 प्रतिशत और ऊपरी-मध्यम-आय वाले 93 प्रतिशत देशों में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के लिये ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफार्मों को अपनाया गया है। भारत में भी डिजिटल कक्षाओं का प्रबंधन किया गया और अभी भी जारी है। हमारी सरकार भी प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा प्रणालियों पर जोर दे रही है, लेकिन हमारे देश में अनेक स्कूलों और परिवारों के पास डिजिटल डिवाइस, इंटरनेट कनेक्शन और अन्य उपकरणों का अभाव है। सरकारें उसमें भी तेजी लाने का प्रयास कर रही है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि कोविड-19 के दौरान स्कूल ड्रॉप-आउट दर भी बढ़ सकती है, क्योंकि अफ्रीका में इबोला महामारी के दौरान जो बच्चे विद्यालय नहीं जा पाये थे, वे इबोला संकट खत्म होने के बाद भी स्कूल नहीं गये। उन्होंने देशवासियों का आह्वान करते हुये कहा कि कोविड-19 के दौरान भारत के जनमानस ने धैर्य और शान्ति का परिचय दिया और अभी भी धैर्य के साथ इस वैश्विक महामारी का सामना कर रहे हैं। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि स्वस्थ्य, सुरक्षा और पोषण के साथ शिक्षा पर ध्यान देना भी जरूरी है। उन्होने कहा कि भारत की अधिकांश आबादी ऐसी है जिनके पास  डिजिटल प्लेटफार्म नहीं है ऐसे में विद्यालयों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, इसलिये विद्यालयों को ऑनलाइन कक्षाओं के आयोजन की दिशा में व्यापक रणनीति तथा मूल्यांकन प्रणाली को अपनाने की आवश्यकता है ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।

 

 

ऋषिकेश, 3 सितऋषिकेश, 3 सितम्बर।न के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण वैश्विक स्तर पर जो उथल-पुथल हुई इस पर चिंता व्यक्त करते हुये कहा कि, कोविड – 19 ने बच्चों की शिक्षा को भी अत्यधिक प्रभावित किया है। शिक्षा, किसी भी व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जिस देश में बच्चों को सही और उपयुक्त शिक्षा मिल रही है अर्थात उस देश में योग्य और कुशल मानव संसाधन का विकास सम्भव है। शिक्षित होकर बच्चे नये-नये शोध के माध्यम से देश की मदद करते है और राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान देते हैं। शिक्षा, बच्चों के व्यक्तित्व, आचरण और मूल्यों को निखारती है तथा उन्हें एक श्रेष्ठ नागरिक बनने में मदद करती है। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण वैश्विक स्तर की व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर हुआ है। साथ ही शिक्षा का क्षेत्र भी काफी प्रभावित हुआ है। ‘संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन’ द्वारा जारी की जाने वाली ‘वैश्विक शिक्षा निगरानी’ रिपोर्ट- 2020 के अनुसार, कोविड-19 महामारी के कारण वैश्विक शिक्षा अंतराल में वृद्धि हुई है। इस दौरान निम्न तथा निम्न-मध्यम-आय वाले लगभग 40 प्रतिशत देशों में गरीब, भाषाई अल्पसंख्यक और विकलांग लोगों को शिक्षा संबंधी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मार्च और अप्रैल, 2020 से विश्व में अधिकांश विद्यालय बंद रहे, इस कारण विश्व के लगभग 91 प्रतिशत छात्र स्कूल नहीं जा पाए। इस रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान विश्व में दूरस्थ शिक्षा प्रणाली और उपायों को अपनाया गया जो कि वास्तव में कक्षा आधारित प्रणालियों की तुलना में कम प्रभावी रही है। रिपोर्ट के अनुसार, निम्न-आय वाले 55 प्रतिशत निम्न-मध्यम-आय वाले 73 प्रतिशत और ऊपरी-मध्यम-आय वाले 93 प्रतिशत देशों में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के लिये ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफार्मों को अपनाया गया है। भारत में भी डिजिटल कक्षाओं का प्रबंधन किया गया और अभी भी जारी है। हमारी सरकार भी प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा प्रणालियों पर जोर दे रही है, लेकिन हमारे देश में अनेक स्कूलों और परिवारों के पास डिजिटल डिवाइस, इंटरनेट कनेक्शन और अन्य उपकरणों का अभाव है। सरकारें उसमें भी तेजी लाने का प्रयास कर रही है। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि कोविड-19 के दौरान स्कूल ड्रॉप-आउट दर भी बढ़ सकती है, क्योंकि अफ्रीका में इबोला महामारी के दौरान जो बच्चे विद्यालय नहीं जा पाये थे, वे इबोला संकट खत्म होने के बाद भी स्कूल नहीं गये। उन्होंने देशवासियों का आह्वान करते हुये कहा कि कोविड-19 के दौरान भारत के जनमानस ने धैर्य और शान्ति का परिचय दिया और अभी भी धैर्य के साथ इस वैश्विक महामारी का सामना कर रहे हैं। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि स्वस्थ्य, सुरक्षा और पोषण के साथ शिक्षा पर ध्यान देना भी जरूरी है। उन्होने कहा कि भारत की अधिकांश आबादी ऐसी है जिनके पास डिजिटल प्लेटफार्म नहीं है ऐसे में विद्यालयों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, इसलिये विद्यालयों को ऑनलाइन कक्षाओं के आयोजन की दिशा में व्यापक रणनीति तथा मूल्यांकन प्रणाली को अपनाने की आवश्यकता है ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।

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