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जब भारत का ज्ञान ही उसके लिए मुसीबत बन गया – भाग 2

लेखक: रजनीश शर्मा कैसे भारत के कपड़ों ने ही उसकी गुलामी की कहानी बुनी: पहले भाग में हमने देखा कि कैसे भारत के बौद्धिक उपहारों—शून्य, बीजगणित और खगोल विज्ञान—ने यूरोप को जगाया और बाद में उन्हीं का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया। अब इस ‘बूमरैंग’ (पलटवार) का दूसरा अध्याय सामने …

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जब भारत का अपना ज्ञान ही उसके लिए मुसीबत बन गया — I

लेखक: रजनीश शर्मा भारत ने उन बौद्धिक औजारों और सोच को विकसित करने में मदद की, जिन्होंने आगे चलकर यूरोप को भारत पर राज करने के काबिल बनाया। जो देश कभी दुनिया का ‘गुरु’ था, वह ‘गुलाम’ बन गया। लेकिन विडंबना (irony) इससे भी गहरी है: जब यूरोपीय भारत आए, …

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Nobel Laureate Lecture Connects Global Science with Rural Uttarakhand

-Dr. Bharat Pandey Nobel Laureate Lecture Connects Global Science with Rural Uttarakhand Ranikhet, Jan 31, 2026: In an important academic initiative aimed at strengthening higher education in the remote and rural regions of Uttarakhand, Government P.G. College, Ranikhet joined hands as a knowledge partener with Bhaktiivedanta Institute the organiser of …

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जब मशीनें ‘हाँ-ना’ के दायरे से बाहर निकलती हैं: क्यों AI भारतीय सोच के करीब आ रहा है?

— रजनीश शर्मा महाशिवरात्रि आने वाली है, ऐसे में यह लेख सोचने के लिए एक नया नजरिया देता है। जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बेहतर हो रहा है, यह उन पुराने नियमों (0 और 1) को छोड़ रहा है जिन पर इसे बनाया गया था। हैरानी की बात यह है कि …

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भारत की फ्लावर पावर: पंखुड़ियों, सुगंधों और सॉफ्ट पावर की एक इंद्रिय सिम्फ़नी

लेखक: रजनीश शर्मा पुरस्कार विजेता संपादक एवं विचारक आज सुबह, जब सर्दी की जकड़न आखिरकार ढीली पड़ती है, भारत एक ऐसे आकाश के नीचे जागता है जो धुलकर हल्का नीला हो गया है। आज, 23 जनवरी को बसंत पंचमी मनाई जा रही है—वसंत का उजला उद्घोष। उत्तर भारत में भक्त …

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