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देवेन्द्र और राज का उद्वव पर हमला

मुम्बई और संभाजीनगर में धूम

-नेशनल वार्ता ब्यूरो-

देवेन्द्र फणनवीस और राज ठाकरे ने उद्वव की हनुमान चालीसा विरोधी अनीति पर एक साथ धावा बोला है। शिवसेना थर-थर काँप रही है। शिवसेना के संगी साथी भौंचक्के रह गए हैं। आज महाराष्ट्र का स्थापना दिवस भी है। संभाजीनगर जिसे औंरगाबाद कहा जाता है वहाँ राज ठाकरे का धुआँधार भाषण चल रहा है। यह भाषण निर्णायक होने जा रहा है। लोग कई घण्टों से राज ठाकरे का इंतजार कर रहे थे। इस नगर को औरंगजेब के नाम से औरंगाबाद कहा जाता है। औरंगजेब ने अपनी जिहादी मानसिकता के चलते संभाजीनगर पर आईएसआईएस वाले जुल्म किए थे। उनके एक-एक अंग को उनके शरीर से अलग किया गया था। लेकिन संभाजी महाराज झुके नहीं। उन्होंने इस्लाम कबूल करने से मना कर दिया था। औरंगजेब ने अपने समय में कई महान लोगों का इसलिए कत्ल किया क्योंकि उन्होंने इस्लाम नहीं स्वीकारा। इस्लाम का यही मूलमंत्र है जिसे जिहाद कहा जाता है। आज संभाजीनगर में राज गरज रहें हैं और अपनी सौगंध दोहरा रहे हैं कि मस्जिदो से लाउडस्पीकर उतारे जाएं। उनका कहना कि एक दिन में 5 बार अजान होती है और साल में 365 दिन होते है। इस तरह जबरन दूसरों को जोर-जोर से अजान सुनाना ठीक नहीं है। हो सकता है कि इस रैली के दौरान किसी तरह कि कोई गड़बड़ी हो। स्थिति संवेदनशील दिख रही है। उनके पुत्र भी मंच पर मौजूद है। बीच-बीच में जय श्री राम के नारे भी गूँज रहे है। राज ठाकरे महानिर्माण सेना के कर्ता-धर्ता हैं और उन्होंने भगवा चोला धारण कर लिया है। अगर वे इस रैली से सलामत निकल गए तो आगे भी वे अपना विरोध जारी रखेंगे और शिवसेना को उसकी गलतियों का एहसास कराते रहेंगे। इस भीड़ में भगवान हनुमान बना व्यक्ति भी गदा लिए घूम रहा है। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फणनवीस मुम्बई में एक विशाल रैली में अपने विचार प्रस्तुत कर रहे है। भाजपा और महा निर्माण सेना उद्वव सरकार को घेर रही है। उद्वव सरकार अपने फैसलों के लिए आलोचना के केन्द्र में है। नवनीत राणा और रवि राणा पर देशद्रोह का आरोप बेबुनियाद है फिर भी वे जेल काट रहे है। यदि हालात यही रहे तो आने वाले बीएमसी चुनाव में शिवसेना को हार का सामना भी करना पड़ सकता है। इसके बाद भी तीन दलों की सरकार रास्ते पर नहीं आई तो दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में इन्हें कुर्सी छोड़नी पड़ेगी। -सावित्री पुत्र वीर झुग्गीवाला (वीरेन्द्र देव), पत्रकार,देहरादून।


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