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जीवन का प्रत्येक कर्म हो योगमय: स्वामी चिदानन्द

-परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती  और अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक डा साध्वी भगवती सरस्वती  का विशेष सत्संग

-कैलाश खेर के संगीत ने बिखेरा जादू

ऋषिकेश (दीपक राणा) । परमार्थ निकेतन में 35 वें अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का आयोजन परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश द्वारा जी-20, अतुल्य भारत, पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से संस्कृति मंत्रालय, आयुष मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वाधान में किया जा रहा है। आज के विशेष आध्यात्मिक सत्र में स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी ने योग प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
परमार्थ निकेेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि जीवन का प्रत्येक कर्म योगमय रूप से किया जाये तो वह परमात्मा की ओर ले जाता है। योग केवल आसनों का समूह मात्र नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण जीवन पद्धति है। दैनिक जीवन में कब उठना, कब सोना, क्या करना, कैसे करना सब यौगिक जीवन का ही अंग है। योग में स्थित रहते हुये, सभी कर्मो को करें तो सफलता अवश्य मिलेगी और युक्ताहार विहारस्य युक्त अर्थात् योग का अर्थ है बैलेंस, संयम अर्थात् आहर-विहार, विचार और व्यवहार का संयम बना रहें।
योग शरीर, मन और भावनाओं में संतुलन और सामंजस्य स्थापित करने का एक श्रेष्ठ माध्यम है। यह मनुष्य को आध्यात्मिक ऊँचाईयों तक पहुँचाता है और तनावमुक्त जीवन जीना सिखाता है। यह एक जीवन  पद्धति है इसलिये योग को जीवनशैली बनाना बहुत जरूरी है, परमार्थ निकेतन से आप इस दिव्य मंत्र को लेकर जाये और अपने जीवन को योगमय बनाये।
अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक डा साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि आप प्रत्येक श्वास के साथ अपने आप से और अपने स्व से जुड़ें क्योंकि यही परमात्मा और आत्मा से जुड़ने का मार्ग है। ध्यान के माध्यम से हम अपने प्रति और अधिक जागरूकता होते हैं।
जिस क्षण आप परमात्मा से प्रेम करने लगते हैं, तब आपको परमात्मा की अनुभूति भी होने लगती है। अगर हमारे हृदय में भक्ति है, तो हम परमात्मा से जुड़ाव का भी अनुभव करने लगते हैं तब उनका स्पर्श भी महसूस होता है। आईये योग और ध्यान के माध्यम से स्वयं से और अपने परमात्मा से जुड़े।
योगाचार्य बी. हैप्पी ने कहा कि मैं वर्ष 2013 से अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में आ रही हूँ और मैं यहां पर अपने ज्ञान और अनुभव को साझा कर अत्यंत प्रसन्न हूँ। यहां पर 90 से अधिक देशों के अंतरराष्ट्रीय योगियों के साथ मिलना अत्यंत उत्साहवर्द्धक है। इस महोत्सव ने मेरे जीवन को छुआ है। हमें हर बार खुद के सर्वश्रेष्ठ संस्करण प्रस्तुत करने की प्रेरणा यहां से प्राप्त होती है।
ऑस्ट्रेलिया से अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में प्रतिभाग करने आयी मेलानी ने कहा कि मैं तीसरी बार यहां पर आयी हूँ। यह उत्सव हमारी भावना को जीवंत करता है! यह अत्यंत प्रेरक है यहां पर होने वाली हर गतिविधि एक आशीर्वाद के समान है।
परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश में अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के दूसरे दिन यूएसए के गुरुशब्द सिंह खालसा के साथ सुबह 4ः30 बजे कुंडलिनी साधना, अमेरिका की गुरमुख कौर खालसा ने बताया कि कैसे अपने अंदर सुरक्षा तलाशे, प्रसिद्ध किआ मिलर द्वारा हार्ट लोटस, पावर विन्यास, योगाचार्य आनंद मेहरोत्रा ‘पूर्ण मूल्यों के साथ जीने के लिए शक्ति को जीवंत करना’, बैंगलोर के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध वरिष्ठ आयंगर योग शिक्षक श्री एच.एस. अरुण ने ‘अनट्विस्ट द ट्विस्ट’, ‘आधुनिक बीमारियों से बचना- आयुर्वेद और योग से समाधान’ पर एक सत्र के दौरान, डॉ. राघवन रामनकुट्टी, दत्तात्रेय आयुर्वेद के संस्थापक और श्रीमती शारदा राघवन ने इस बारे में बात की कि कैसे आयुर्वेद एक उपचार प्रणाली है जो शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और योग को जोड़ती है। स्वामी स्वत्वानंद वेदांत द्वारा द अल्टीमेट परस्यूट ऑफ मैन पर एक सत्र में उन्होंने बताया कि कैसे वेदांत, ब्रह्म और आत्मा में ज्ञान के खोज की एक साधना है। माइकल बर्नार्ड बेकविथ संस्थापक एगैप इंटरनेशनल स्पिरिचुअल सेंटर कैलिफोर्निया, एरिका कॉफमैन द्वारा ‘लीला योग’, योगिक योग के सह-संस्थापक और निदेशक मोहन भंडारी के साथ प्राणायाम, सेंसेई संदीप देसाई के बेहद लोकप्रिय चेन स्टाइल ताई ची, चेन्नई योग स्टूडियो के संस्थापक रोहिणी मनोहर द्वारा एनर्जी फ्लो, डॉ. ईडन द्वारा चिकित्सा विन्यास, थेराप्यूटिक फ्लो योग, लोयोला मैरीमाउंट यूनिवर्सिटी, यूएसए के गोल्डमैन, फाइंड पावर इन माई रूट्स चक्र 1 और 7 बैलेंसिंग बाय केटी बी हैप्पी, सत्र का शीर्षक था ‘द बीमिंग पावर ऑफ थंडर लव!’ विश्वविख्यात न्यूरोसाइंटिस्ट और इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मैथेमेटिक्स एंड कॉन्शसनेस के संस्थापक डॉ. टोनी नादर ने ‘चेतना ही सब कुछ है – वेदांत अनपैक्ड’ विषय पर एक आध्यात्मिक सत्र सम्पन्न हुआ।
दोपहर के भोजन के बाद मंत्रमुग्ध करने वाले लोक नृत्यों के साथ स्वास्थ्य और तंदुरूस्ती पर बातचीत और प्रवचनों की एक श्रृंखला का आयोजन किया गया। आध्यात्मिक स्वास्थ्य, प्रेशर योग के संस्थापक और अनुभवी प्राकृतिक चिकित्सक आचार्य आशीष गिल्होत्रा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्राकृतिक उपचार कैसे दर्द को दूर करने में मदद करता है। पारंपरिक लोकनृत्य भारत की ऐतिहासिक कला और संस्कृति की सुंदर अभिव्यक्ति हैं। नृत्यावली के ‘मारवाड़ी नृत्य’ का प्रदर्शन, डॉ. निशि भट्ट ने शरीर की क्षमताओं को बढ़ाकर एक वैकल्पिक उपचार पद्धति के रूप में नाड़ी योग के विषय में गहराई से विचार प्रस्तुत किये, जर्मनी की शांति मनप्रीत के साथ एक पवित्र ध्वनि और हीलिंग ‘क्रिस्टल साउंडिंग हार्ट’, आयुशक्ति की सह-संस्थापक डॉ. स्मिता पंकज नारम ने जीवंत स्वास्थ्य और आनंदमय खुशी के 3 रहस्यों के विषय में चर्चा की।
योगसोमोस्टोडोस फाउंडेशन के अध्यक्ष और सीईओ जय हरि सिंह द्वारा अपनी चेतना को कैसे जगाये, हृदय चक्र संतुलन पर सत्र का संचालन विश्व प्रसिद्ध योगऋषि विश्वकेतु, आनंद प्रकाश योग आश्रम के संस्थापक और योगासन के लेखक द्वारा किया गया, ‘वॉयसिंग द साउंड्स ऑफ योर चक्र’ नामक जापान के गुमी और हिरोको द्वारा आयोजित किया गया था।
तत्पश्चात सभी प्रतिभागियों ने पवित्र गंगा आरती और विश्व शान्ति हवन में सहभाग किया तत्पश्चात संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से उत्तराखंड रंगोत्सव का विशेष प्रदर्शन किया गया। यह उत्तराखंड के लोकनृत्य, पारंपरिक, कलात्मक और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रदर्शन किया। पद्मश्री कैलाश खेर के विशेष सूफी संगीत ने प्रतिभागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

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