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ट्रेन दुर्घटना: 250 लोगों की मौत हुई..। चीत्कार से बचने के लिए अपनों को खींचते रहे लोग

ट्रेन दुर्घटना: 250 लोगों की मौत हुई..। चीत्कार से बचने के लिए अपनों को खींचते रहे लोग

ट्रेन दुर्घटना की खबर: बुधवार को नई दिल्ली-दरभंगा एक्सप्रेस में आग लग गई।

चार कोच जलकर राख हो गए। आग की लपटों में घिरे हुए एस-1, एस-2, एस-3 और दिव्यांग कोच में करीब 250 यात्री सवार थे। ट्रेन को यात्रियों ने चेन पुलिंग कर रोक दिया। लगभग डेढ़ घंटे में आग पर चार फायर ब्रिगेड गाड़ियों ने काबू पाया।

इटावा में बुधवार शाम करीब साढ़े पांच बजे हावड़ा रेलवे रूट पर नई दिल्ली से दरभंगा जा रही क्लोन एक्सप्रेस के एस-1 कोच में आग लग गई। उस समय दिव्यांग कोचों, एस-2 और एस-3 भी एक-एक कर लपटों में घिर गए। चारों कोच के साथ करीब 250 यात्री चल रहे थे।

आग की लपटों से घिरे हुए यात्रियों में शोर मच गया। आननफानन लोग चेन पुलिंग करते थे। ट्रेन सरयभूपत स्टेशन पर रुकते ही भगदड़ मच गई। ट्रेन की खिड़की से कूदकर कई यात्रियों ने जान बचाई। इससे आठ व्यक्ति घायल हो गए। लगभग साढ़े पांच बज गए थे। नई दिल्ली-दरभंगा क्लोन एक्सप्रेस के एस-1 कोच में कुछ यात्री अपनी सीटों पर बैठे थे, जबकि कुछ यात्री दरवाजे पर खड़े होकर बातें कर रहे थे। इस बीच, अचानक एक तेज धमाके के साथ तेज हवा उठना शुरू हुआ। लोग लपटें देखकर और आवाज सुनकर भागने लगे।

प्रत्येक यात्री अपने आप को बचाने में लग गया था। लोगों ने हाथ से खींचकर लोगों को बचाया। दिल्ली से अपने भाई भीम के साथ गोरखपुर जा रहे गोविंद कुमार भी 48 नंबर सीट पर एस-1 कोच में सवार थे। उसने कहा कि ट्रेन की चेन पुलिंग होते ही सभी लोग गेटों से कूदने लगे।

ट्रेन से कूदते हुए उनका भाई भीड़ में फंस गया। धक्कों के बीच भाई को किसी तरह बाहर निकाला। वस्त्राभूषण और चप्पल वहीं रह गए। उनका कहना था कि २० से ३० नंबर सीट से अचानक आग उठने लगी थी। हादसे के समय ऐसा लगा जैसे कोई पटाखा जल गया हो।

जान सबसे महत्वपूर्ण है

ट्रेन के एस-3 कोच में बैठी निशा देवी ने बताया कि उन्होंने पांच टिकट बुक करवाए थे। शयनयान में आरक्षण मिलने के बाद भी वे बैठकर यात्रा करते रहे।लोग भागते देखा जब ट्रेन अचानक रुकी। वह भी ट्रेन से अपने बच्चों के साथ उतर गई। उसी में उनके सामान रह गए। उन्हें लड़खड़ाती जुबान से कहा कि जान सामान से अधिक महत्वपूर्ण है। 

सामानों को छोड़कर ट्रेन से कूद गया बबीता

यात्रिनी बबीता ने बताया कि वह एस-4 कोच में थी। रुकने वाली ट्रेन अचानक रुक गई।लोग ट्रेन से भागने लगे जब तक कि वे कुछ समझ पाए। साथ ही, वे अपने सामान को छोड़कर बच गए। यद्यपि आग उनके कोच से काफी दूर थी, फिर भी वे नहीं जानते थे कि क्या करें।

और कर्मचारियों की व्यस्तता से परेशान यात्री

ट्रेन में आग लगने के बाद चार कोचों को अलग कर दिया गया। स्टेशन पर बैठे यात्रियों को रेलवे और जिला प्रशासन ने उसी ट्रेन में भेजा। उस समय वह स्टेशन पर अपने परिजनों का इंतजार कर रही थी, लेकिन रेखा के कर्मचारियों ने कहा कि वह अपने परिवार के लोगों को खोज रही है।

क्रासिंग रोकने से परेशान लोग

हादसे के दौरान जिले में सरायभूपत, रामनगर फाटक सहित सभी क्रासिंग बंद रहीं। लगभग पांच क्रासिंग बंद होने से लोगों को घंटों जाम की समस्या भी हुई।

ट्रेन हादसे में घायल

यात्रा करने वाले अधिकांश लोग बिहार प्रांत के दरंभगा जिले से हैं। हादसे में दयानंद पुत्र हरदेव मंडल नंद निवासी ग्राम शंकर लोहार जिला दरभंगा, रौनक राज (12) पुत्र दयानंद मंडल निवासी ग्राम शंकर लोहार जिला दरभंगा, मनोज चोपाल (37) पुत्र राम चोपाल निवासी बेनीपुर जिला दरभंगा, हरेंद्र यादव (26) पुत्र रामविलास निवासी ग्राम उसमामठ थाना पतोंर जिला दरभंगा, टिल्लू मुखिया (18) पुत्र कारी मुखिया निवासी ग्राम गुसवा थाना

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