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हमारी प्रोडक्टिविटी इको-फ्रेंडली हो-पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज

राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस

? हमारे देश का बिजनेस माॅडल ’प्रोड्यूस, यूज एंड रियूज’ के सूत्र पर आधारित

? हमारी प्रोडक्टिविटी इको-फ्रेंडली हो-पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज

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ऋषिकेश (दीपक राणा) । राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस प्रतिवर्ष 12 फरवरी को मनाया जाता है। भारत में उत्पादकता संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एनपीसी) द्वारा यह दिवस मनाया जाता है। भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (एनपीसी) उत्पादकता बढ़ाने, प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में समाधान प्रदान करने हेतु कार्य करता है।
राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि हमारे देश का बिजनेस माॅडल ’प्रोड्यूस, यूज एंड रियूज’ के मंत्र के साथ आगे बढ़े। हम वस्तुओं का निर्माण, उपयोग और फिर पुनः उपयोग के इस अनूठे माॅडल को विकसित करेंगे तो निश्चित रूप से हमारी अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक मूल्यों में भी वृद्धि होगी। समग्र, सुरक्षित और सतत विकास के माध्यम से ही प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग और प्रबंधन किया जा सकता हैं। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि 21 वीं सदी में न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में ग्रीन माॅडल पर आधारित स्मार्ट फैक्टरियों को निर्माण की आवश्यकता है। हमें एक ऐसी औद्योगिक क्रान्ति लाना होगा जिसमें बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पादों का संवर्द्धन हो, रोजगारों का सृजन हो तथा प्रकृति के साथ मानवता पूर्ण व्यवहार किया जाये। हमें एक ऐसी वेल्यू चेन बनानी होगी जो प्रकृति और फैक्टरियों के बीच हरित सम्बंधों को मजबूत करें। हम सभी को ग्रीड कल्चर से नीड कल्चर और ग्रीन कल्चर की ओर बढ़ना होगा तथा यूज एंड थ्रो कल्चर से यूज एंड ग्रो कल्चर की ओर बढ़ना होगा तभी हमारे प्राकृतिक संसाधन आने वाली पीढ़ियों के लिये भी सुरक्षित रह सकते है। उन्होंने कहा कि ग्रीन इन्डस्ट्री के निर्माण में हम सभी को ईमानदार, जागरूक, जिम्मेदार और जबावदेह होना होगा। जब उत्पादों का निर्माण हरित व जैविक रूप से होगा तो पर्यावरण प्रदूषण भी कम होगा। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि आईये राष्ट्रीय उत्पादकता दिवस के अवसर पर संकल्प लें कि हमारी प्रोडक्टिविटी हमेशा इको-फ्रेंडली हो।

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