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कलश यात्रा में माँ दुर्गा और श्री राम के भजन गूँजे

-नेशनल वार्ता ब्यूरो-

श्रद्धालु त्रिशूल लहराते हुए भजनों के साथ ठुमके लगाते हुए कलश यात्रा पर निकले। माँ दुर्गा पूजन समारोह के पहले दिन शाम चार बजे कलश यात्रा निकाली गई। यह कलश यात्रा माँ दुर्गा पूजन समारोह का अभिन्न हिस्सा है। दो दिन पहले तेग बहादुर मार्ग स्थित सागर गिरि आश्रम से जुड़े श्रद्धालुओं ने माँ दुर्गा उत्सव का श्री गणेश भव्य कलश यात्रा निकाल कर किया। सागर गिरि आश्रम के आस-पास की श्रद्धालु महिलाएं और पुरुष बच्चों के साथ इस कलश यात्रा के सहभागी बने। यह कलश यात्रा सागर गिरि आश्रम से निकल कर पॉली किड्स तिराहे से होकर नेहरु कॉलानी स्थित फव्वारा चौक से होकर पुनः सागर गिरि आश्रम पहुँची। इस कलश यात्रा में गढ़वाली और हिन्दी भजनों की गूँज की बीच श्रद्धालु नाचते-गाते हुए अपनी श्रद्धा प्रकट कर रहे थे। श्रद्धालु बारी-बारी से त्रिशुल नृत्य कर रहे थे। माँ दुर्गा के भजनों के साथ-साथ भगवान श्री राम के भजन भी पूरे हर्षोउल्लास के साथ बज रहे थे। विधित रहे कि 25 सितम्बर से 5 अक्टूबर तक चलने वाले इस देवी-दुर्गा पूजन समारोह में हर साल बढ़-चढ कर हिस्सा लेते हैं। कलश पूजन यात्रा से पहले ब्रह्म मुहुर्त में केला पूजन किया गया। केला पूजन भी धार्मिक रीति-रिवाज के साथ पूरे धार्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस पूरे दुर्गा पूजन अभियान में बंगाली समाज के श्रद्धालु बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। इस बार भी बंगाली बंधु श्रद्धा भाव में डूब कर इस दुर्गा पूजन के समारोह में चार चाँद लगा रहे हैं। कलश यात्रा का नेतृत्व महंत अनुपमा नंद गिरि और व्यास महाराज श्री शिवोहम बाबा अमिता नंद जी कर रहे थे। हर साल की तरह सागर गिरि आश्रम में दुर्गा समारोह की धूम रहती है। इस बार सागर गिरि आश्रम के प्रांगण में महंत अनुपमा नंद गिरी जी ने एक भव्य पांडाल लगवाया है ताकि माँ दुर्गा पूजन समारोह समर्पित भाव से मनाया जा सके और अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालु माँ दुर्गा का आशीर्वाद पाकर धन्य हो सकें। कलश यात्रा संपन्न होने के बाद महंत अनुपमा नंद गिरी और व्यास जी श्री शिवोहम बाबा अमिता नंद जी के साथ श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन किया। यह भजन कीर्तन काफी देर तक चलता रहा इस तरह पावन आरती के साथ कलश यात्रा का समापन हुआ। सागर गिरि आश्रम के आस-पास के श्रद्धालु इस आश्रम से कई दशकों से जुड़े हैं। यह आश्रम इस पूरे क्षेत्र के श्रद्धालुओं की श्रद्धा के केन्द्र है। इसीलिए , इस आश्रम की पवित्रता को बनाए रखने के लिए लोग संघर्ष भी कर रहे हैं।

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