कौन राजा कौन प्रजा कैसा राजपथ

-नेशनल वार्ता ब्यूरो-

भारत में किसी राजा का राज्य नहीं चल रहा है जो किसी खास पथ को राजपथ कहा जाए। कर्तव्य पथ बहुत अच्छा नाम है। बहुत अच्छी भावना है। मोदी जी को इस काम के लिए शत् शत् नमन्। आप सचमुच देश की दिशा दशा बदलने की कोशिश मंे हैं। आप तो देश की राजनीति बदलने की कसरत भी कर रहे हैं। आप देश को जातपात और मजहब के दल-दल से निकालना चाहते हैं। लेकिन राजनीतिक दल जातपात और मजहबवाद के कीचड़ में खिलने वाले कमल हैं। ऐसे में ये राजनीतिक दल कीचड़ को कैसे सुखा पाएंगे। ये तो कीचड़ फैला रहे हैं ताकि इनके स्वार्थों का कमल चप्पे-चप्पे पर खिले और राष्ट्रवाद का सत्यानाश हो जाए। ये राजनीतिक दल राष्ट्रवाद को गाली देते हैं। ये राजनीतिक दल राष्ट्रवाद को हिटलर से जोड़ते हैं। इनके अनाड़ीपने की कोई सीमा नहीं। राष्ट्र के हित के मामले में ये अनाड़ी हैं लेकिन अपने स्वार्थो के बारे में ये खिलाड़ी हैं। बहरहाल, आपने राजपथ का नाम हटाकर कर्तव्यपथ रख दिया। हम तो चाहते हैं कि आप राष्ट्रपति भवन से एक दो किमी के फासले पर जहाँ कुछ नारियाँ अपनी बेचारगी को बेच कर जीवन यापन कर रही हैं उन्हें आप हस्तकला कौशल सिखा कर उनके पाँवों पर खड़ा कर दें। नारी देह किसी मंदिर से कम नहीं। इसका अपमान मानवता का अपमान है। भारत में किसी भी नारी को विवशता की इस हद तक ना जाने पड़े। इसलिए पूरे देश की ऐसी नारियों को हस्तकला कौशल में दक्ष बनाया जाना चाहिए। उन्हें कम्प्यूटर चलाना सिखया जाना चाहिए। उन्हें छोटी-छोटी गाड़ियाँ चलाया जाना सिखाया जाना चाहिए। उन्हें उनके पाँवों पर खड़ा किया जाना चाहिए। भारत जैसे राष्ट्र में यह संभव नहीं तो फिर कहाँ संभव होगा। हम भारत को क्या वैश्यावृत्ति से मुक्त नहीं कर सकते। क्या हमारे अन्दर इतनी इच्छाशक्ति नहीं है। अगर ऐसा है तो फिर रामराज्य कैसे आएगा।

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