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खिलाड़ियों को प्रोत्साहन

-डॉ प्रशांत थपलियाल, देहरादून

उत्तराखंड सरकार का छह विभागों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों हेतु 156 पद सृजित किया जाना अत्यंत सराहनीय कदम है। इस कदम से खिलाड़ियों के मनोबल का उन्नयन होगा साथ ही उन्हें भविष्य की प्रतियोगिताओं में ज्यादा उत्साह से प्रतिभाग करने की प्रेरणा भी मिलेगी। वर्तमान परिदृश्य में अधिकतर खिलाड़ी भविष्य के रोज़गार की चिंताओं के मद्देनज़र अपने खेल को मध्य में ही विराम दे देते हैं। कुछ अभिभावकों का यह भी मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में अधिक से अधिक अच्छी श्रेणी के खिलाड़ी चतुर्थ श्रेणी का रोज़गार प्राप्त कर सकते हैं। इस कारण वे अपने बच्चों को खेल को आगे जारी रखने हेतु हतोत्साहित करते हैं। किन्तु उत्तराखंड सरकार की इस पहल से उन्हें भी सोचने का मौका मिलेगा और अंततः यह पहल राज्य हित में होगी। मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव से एक बात सरकार तक पहुंचाना चाहता हूँ कि आर्थिक रूप से सक्षम खिलाड़ियों को इस प्रकार के रोज़गार की आवश्यकता नहीं होती। समस्या निम्न एवं मध्य वर्ग की है जिन्हें अपने खेल को विभिन्न कारणों से ऊँचाई की ओर ले जाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन कारणों में सर्व प्रथम आर्थिक कारण है। सर्व विदित है कि प्रतिभावान खिलाड़ी को आगे बढ़ने हेतु एक अच्छे प्रशिक्षक, संतुलित भोजन एवं पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है। यदि सरकार प्रतिभा खोजने के उपरांत उन्हें तराशने में भी सहयोग प्रदान करे तो वह दिन दूर नहीं जब उत्तराखंड राष्ट्रीय ही नहीं अपितु अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी अपना परचम लहराएगा।

 


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