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गीताजंलि ने जीता अन्तर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार

मैनपुरी की गीताजंलि ने भारत का मान बढ़ाया
-वीरेन्द्र देव गौड़, पत्रकार, देहरादून
मैनपुरी, उत्तर प्रदेश की 64 वर्षीय लेखिका गीताजंलि श्री ने अपने उपन्यास ‘‘टाम्ब ऑॅफ सैन्ड’’ के लिए अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीता है। यह पुरस्कार उन्हें उपन्यास लेखन के लिए दिया गया है। इसका अनुवाद हिन्दी से अंग्रेजी में डेजी रॉकवेल ने किया है। डेजी रॉकवेल पेन्टर एवं लेखिका हैं और अमेरिका में रहती हैं। यह पुरस्कार हर साल अंग्रेजी में लिखे गए और यूके या आयरलैण्ड में प्रकाशित होने वाले सर्वश्रेष्ठ उपन्यास के लिए दिया जाता है। पुस्तक के चयन की घोषणा 7 अप्रैल 2022 को लन्दन बुक फेयर में की गयी थी। जबकि विजेता की घोषणा कल की गयी थी। लेखिका ने मूल रूप से यह उपन्यास हिन्दी में लिखा है। इसका रूपान्तरण बहुत प्रभावी है। तभी तो उपन्यास को पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। यह पुस्तक संसार की 13 पुस्तकों में शामिल है जिसे यह पुरस्कार मिला है। हिन्दी उपन्यास के क्षेत्र में यह पहला अवसर है जब किसी हिन्दी लेखिका के उपन्यास को यह पुरस्कार मिला है। गीताजंलि श्री इस तरह पहली भारतीय महिला हैं जिन्हें हिन्दी उपन्यास के लिए यह सम्मान मिला है। मैनपुरी में ही नहीं पूरे उत्तर प्रदेश में यह खबर तेजी से फैल चुकी है। भारत में लेखिका के लिए गजब का सम्मान भाव देखा जा रहा है। भारत में भी अब उनके शानदार लेखन के लिए उन्हें सम्मानित करने की होड़ लगने वाली है।

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