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छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थल

छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल : छत्तीसगढ़ भारत का १० वां सबसे बड़ा क्षेत्र फल वाला राज्य है. जो भारत के प्रमुख राज्यों में से एक है। जिसे भारत का ह्दय स्थल के नाम से भी जाना जाता है। जो १ नवंबर २००० को मध्यप्रदेश से अलग होकर जिसका निर्माण हुआ है। छत्तीसगढ़ का अर्थ है एक ऐसा महान कृषि प्रधान राज्य से है। जहाँ बहुत ही भोले भले व मेहनती लोग निवास करते है

जो धान की अधिक पैदावार होने के कारण जिसे ”धान का कटोरा” कहा जाता है जिसका प्राचीन नाम दक्षिण कौसल है। जहाँ की आधा से ज्यादा आबादी आदिवासी लोग निवास करते है। छत्तीसगढ़ भारत देश का एक सुंदर राज्य है जो प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है साथ ही एक विशाल काय घने जंगलों वाला राज्य है, जो चारों ओर से ऊँची पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा हुआ है। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल की बात की जाए तो छत्तीसगढ़ में पर्यटन स्थलों की कमी नही है यहाँ १०० से अधिक छत्तीसगढ़ में पर्यटन स्थल है । मन को हरने वाला यहाँ ऐतिहासिक इमारतें, वन्य जीव, खूबसूरत झरने, प्राचीन किला , धार्मिक स्थल इत्यादि देखने को मिलेंगे।

तो चलिए दोस्तों जानते है छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों  के बारे में इस लेख द्वारा जानकारी लेते हैं ।
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छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोकगीत
छत्तीसगढ़ी गायकों के नाम
छत्तीसगढ़ की राजधानी क्या है पर्यटक की दृष्टि कोण से छत्तीसगढ़ में १००+ से ज्यादा पर्यटन स्थल है परन्तु हमने यहाँ २० छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का वर्णन किया है। जिसमें कुछ बेहतरीन पर्यटन स्थल के बारे में जानेंगे। अगर आप भी छत्तीसगढ़ घूमने की योजना बना रहे हैं

तो हमने नीचे जितने भी छत्तीसगढ़ के २० सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलके बारे में बताया है वहाँ जाना न भूले दोस्तों वरना आप छत्तीसगढ़ के असल पर्यटन स्थल से वंचित रह जाएंगे तो हमने को जो हमने छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का वर्णन किया है वह जरूर जाए

भोरमदेव मंदिर – छत्तीसगढ़ के खजुराहो के नाम से प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर प्रदेश का एक ऐतिहासिक मंदिर है जो कबीरधाम से लगभग १६ कि.मी. की दूरी पर चौराग्राम में मैकल श्रेणी पर स्थित है। फणीनागवंशी शासक गोपाल देव द्वारा ११वीं सदी में इस प्रसिद्ध मंदिर का निर्माण कराया गया था। यहां के दीवारों पर विभिन्न काम मुद्राओं में अनुरक्त युगलों का कलात्मक अंकन किया गया है। इसलिए इस मंदिर को छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाता है। भोरमदेव क्षेत्र के आस-पास भोरमदेव अभ्यारण्य है जहां प्राकृतिक रूप से जंगली जानवरों को विचरण करते देखा जा सकता है।

चैत्र रामनवमी के अवसर पर यहां लगने वाला भव्य मेला पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बिन्दु होता है। भोरमदेव महोत्सव में विदेशों के कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां दी जाती है जो राज्य सरकार के लिए एक गौरवान्वित करने वाले महोत्सव के रूप में अपनी विशेषताओं को समेटे हुये है।

राजिम – छत्तीसगढ़ की प्रयाग नगरी के नाम से प्रसिद्ध राजिम नगरी, महानदी, पैरी नदी और सोंढूर नदी के त्रिवेणी संगम पर गरियाबंद जिले में स्थित है। यह छत्तीसगढ़ में सामाजिक, धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।

यहां पर नलवंशीय शासक विलासतुंग के द्वारा ७वीं ८वीं शताब्दी में निर्मित राजीव लोचन मंदिर स्थित है। साथ ही संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव मंदिर स्थित है जहां से पंचकोशी यात्रा का शुभारंभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त विशाल बटवृक्ष स्थित है जिसे कृष्ण वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है।

यह पावन नगरी भारत के पांचवें धाम के रूप में प्रसिद्ध है। यहां पर माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक भव्य मेले का आयोजन होता है जिसे छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा पांचवें कुभ मेले का दर्जा दिया गया है।

गिरौदपुरी :- गिरौदपुरी सतनाम पंथ के प्रवर्तक गुरुघासीदासजी की जन्म स्थली है जो बलौदाबाजार जिले में स्थित है।

छत्तीसगढ़ में सतनाम पंथियों के लिये यह एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है जहाँ कुतुबमीनार से भी ऊँचे जैतखाम का निर्माण किया गया है। यहां पर फाल्गुन पंचमी के दिवस विशाल मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें देश-विदेश के लोग भी सम्मिलित होते हैं।


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