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मोदी सरकार के नौ साल

वीरेन्द्र देव गौड़/एम0एस0 चौहान

मोदी सरकार ने नौ साल में अच्छा प्रदर्शन किया। केन्द्र सरकार ने बिना थके काम करने की परम्परा स्थापित कर दी है। ऐसी परम्परा जिसमें तय समय से पहले ही काम पूरा कर दिया जाता है। ऐसा करके काम पर आने वाली लागत घट जाती है और राष्ट्र का लाभ होता है। कार्य संस्कृति पर जोर देकर केन्द्र सरकार ने राष्ट्र को एक नई दिशा दी है। केन्द्र सरकार सभी भारतीयों की सरकार है इसलिए सबका गौरव बढ़ा है। नई संसद इसका सबसे ठोस प्रमाण है। हालाँकि, नई संसद के उद्घाटन को लेकर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही किन्तु असली बात यह है कि राष्ट्र को एक नई संसद चाहिए थी। इस नई संसद का निर्माण लगभग ढाई साल में हुआ है। इसे कीर्तिमान कहा जा सकता है। जब राष्ट्र में कोरोना का हाहाकार मचा हुआ था तब संसद का निर्माण रात दिन चल रहा था। अगर कोरोना के कारण काम रोक दिया जाता तो नई संसद 25-26 में हमें मिल पाती। मोदी सरकार ने अपने पक्के इरादों का परिचय दिया है। कोरोना काल में संसद के निर्माण में जुटे कामगारों का रोजगार भी नहीं छूटा और काम भी लगातार चलता रहा। इसके अलावा मोदी सरकार ने भारतीय सांस्कृतिक परम्परा को भी पुनर्जीवित करने का काम किया है। सिंगोल का सुनहरा प्रतीक जहाँ प्रयागराज के संग्रहालय में निस्तेज होकर पड़ा था वहीं मोदी सरकार के प्रयास से वह अब नई संसद में विराजमान है। यह कोई साधारण छड़ नहीं है जिसे गुमनाम रहने दिया जाता। चोल साम्राज्य के सम्राट हिन्दू परम्परा के समर्पित सम्राट थे। वे नए राजा के बनने पर उसे सिंगोल भेंट कर जिम्मेदारी का अहसास कराते थे। सिंगोल के शीर्ष पर विराजमान नंदी भारतीय सांस्कृतिक परम्परा की अमिट पहचान है। तमिलनाडु के धर्माचार्यों ने उसी चोल परम्परा का निर्वाह करते हुए सिंगोल को प्रधानमंत्री को सौपा। इसे अच्छा संकेत माना जाना चाहिए। राष्ट्र को जीवित रखने के लिए राष्ट्र की अच्छी परम्पराओं को जीवित रखना पड़ता है। यह परम्परा नरेन्द्र मोदी को यह अहसास कराएगी कि राष्ट्र के उत्थान का दायित्व उनके कंधों पर है। इसका कोई अन्य अर्थ नहीं निकाला जा सकता है। नई संसद भूकंपरोधी होने के साथ-साथ बहुत अधिक सुन्दर और बड़ी है। आने वाले 150 वर्षाें की जरूरतों को ध्यान में रख कर इस संसद का निर्माण किया गया है। यह संसद सभी भारतीयों के लिए गौरव का विषय होना चाहिए। इस संसद में भारतीयों के प्रतिनिधि बैठेंगे और गुलामी की निशानी यानी पुरानी संसद के साये से दूर रहेंगे। राष्ट्र के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए दासता की सभी परम्पराओं से मुक्ति जरूरी है। मोदी सरकार यही कर रही है। राष्ट्र के जागरूक लोग मोदी सरकार की इस गंभीरता को समझने की कोशिश करेंगे। इसके अलावा अन्य कई मोर्चों पर सरकार युद्ध स्तर पर काम कर रही है। वंदे भारत एक्सप्रेस का तेजी से निर्माण इस बात का दूसरा ठोस प्रमाण है। बीते दिवस को तो उत्तराखण्ड को भी एक वंदे भारत  रेलगाड़ी का उपहार मिला। यह वंदे भारत एक्सप्रेस रेल देहरादून से दिल्ली आनंद बिहार टर्मिनल तक की यात्रा तय करेगी। हर सप्ताह बुधवार को छोड़ कर यह रेल देहरादून और दिल्ली के बीच सरपट दौड़ेगी। केन्द्र सरकार की चुस्ती फुर्ती विकास के हर क्षेत्र में देखी जा सकती है। उत्तराखण्ड की धामी सरकार भी केन्द्र सरकार के पद चिन्हों पर चलने की कोशिश कर रही है। यदि यह कोशिश जारी रही तो डबल इंजन की सरकार का लाभ उत्तराखण्ड को भी मिलेगा। रक्षा क्षेत्र में भी देश तेजी से प्रगति कर रहा है। अच्छी सड़कों के निर्माण की गति भी तेज हुई है। मूलभूत सुविधाओं को लेकर केन्द्र सरकार सजग है और राष्ट्र प्रगति पथ पर है। नौ सालों में देश विकास की ऊँचाईयों को छू कर साबित कर दिया कि मोदी का नेतृत्व कितना कर्मठ और लगनशील रहा है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कारर्यशैली का बखान विदेशों में बाखूबी से किया जाता है। जिसका उदाहरण मोदी के विदेश दौरे पर देखने को मिला।

 

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