कोई भी आओ पर यह कर डालो
पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव से पहले मुखरता से कहा था कि सत्ता वापसी पर यूनिफॉर्म सिविल कोड लगाया जाएगा। यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता। यह सुनने में जितना अच्छा लगता है उससे अच्छा यह देश के लिए है। गोवा में तो यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू है। जब यह कानून गोवा में लागू है तो अन्य राज्यों में क्यों नहीं। इसे सभी राज्यों में लागू होना चाहिए। जब मोदी सरकार ने समान कर प्रणाली यानी जीएसटी पूरे देश मंे लागू कर दी तो समान नागरिक प्रणाली भी पूरे देश में लागू होनी चाहिए। संविधान की नजरों में सब बराबर हैं।
संविधान के लिए सब भारतीय हैं। उसके बाद नम्बर आता है हिन्दू, मुसलमान या ईसाई होने का। विडम्बना है कि देश को महान बनाने की बाते हो रही हैं लेकिन देश को महान बनाने क्रे लिए जिस एकता की जरूरत है उसमें लेटलतीफी की जा रही है। यह देश मूल रूव से हिन्दुओं का है। फिर भी यह हिन्दुओं की महानता है कि वे कह रहे हैं कि हम सब बराबर हैं। इस दरियादिली का गलत फायदा नहीं उठाया जाना
चाहिए। हिजाब जैसी समस्याएं तब तक देश में कोहराम मचाती रहेंगी जब तक यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू नहीं होता। भाजपा की सरकारों को अपने राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू कर देना चाहिए। पर यह भी सच है कि कट्टर मजहबी उन्माद के चलते शाहीन बाग जैसे वाकिए दोहराए जाने वाले हैं। क्योंकि कुछ लोग यह चाहते हैं कि देश में हर वक्त दंगों का कोहराम मचा रहे और उसे आंदोलन का नाम देकर जायज ठहराया जाता रहे। उत्तराखण्ड में चाहे धामी मुख्यमंत्री बनेें, चाहे अनिल बलूनी बनें और चाहे सतपाल महाराज बनें। कोई भी मुख्यमंत्री बने परन्तु समान नागरिक संहिता का लागू होना राज्य के लिए और देश के लिए बहुत जरूरी है।
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