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बदलाव के लिए संगीत : उत्तराखंड ने देश के 16 अन्य राज्यों के साथ बाल विवाह के खिलाफ मिलाए सुर

-नेशनल वार्ता न्यूज़

बाल विवाह के खिलाफ पूरे देश के साथ सुर मिलाते हुए संगीत के माध्यम से सामाजिक बदलाव के अपनी तरह के संभवत: सबसे बड़े अभियान में बड़ी तादाद में उत्तराखंड के गैर सरकारी संगठनों और लोक कलाकारों ने सुरीले गीतों के जरिए देश से बाल विवाह के खात्मे का आह्वान किया। ‘बदलाव के लिए संगीत’ अभियान के लिए उत्तराखंड के तमाम गैर सरकारी संगठनों ने हाथ मिलाया और राज्य के सुदूर गांवों एवं गलियों तक अपना संदेश पहुंचाने के लिए अपनी भाषा और बोलियों में गीत गाए। उत्तराखंड सहित देश के 17 राज्यों के लोक कलाकारों व लोकगायकों ने बाल विवाह के खिलाफ विभिन्न भाषाओं और बोलियों में अब तक 331 से ज्यादा गाने गाए हैं। सामाजिक बदलाव में लोकगीतों और लोक कलाकारों की अद्वितीय भूमिका को देखते हुए इन्हें व्हाट्सऐप और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए देश के जन-जन तक फैलाया जाएगा और सामाजिक अभियानों से जुड़े कार्यक्रमों में इनका इस्तेमाल किया जाएगा। यह अभिनव पहल देशव्यापी ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान का हिस्सा है। महिला कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज संगठनों की अगुआई में 300 से भी ज्यादा जिलों में चलाए जा रहे इस अभियान का लक्ष्य 2030 तक देश से बाल विवाह का पूरी तरह खात्मा और इस प्रकार तीन करोड़ से ज्यादा बच्चियों को कम उम्र में विवाह से बचाना है।

इस अभियान का उद्देश्य देश में बच्चों की सुरक्षा के लिए मौजूदा सरकारी नीतियों और कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।

‘बदलाव के लिए संगीत’ अभियान का पहला चरण माने गए इस अभियान में संगीत जैसे प्रभावशाली और ताकतवर माध्यम का इस्तेमाल करते हुए लोक गायकों, स्थानीय कलाकारों और ग्रामीणों जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, ने जहां भी, जिस क्षमता में और जैसे भी बन पड़ा, अपने गाने रिकॉर्ड किए। नतीजा विभिन्न भाषाओं और बोलियों में अनुपम जुनून और उमंग के साथ स्थानीय कलाकारों द्वारा गली-चौबारों, खेत खलिहानों और गांव की चौपालों, घरों और स्कूलों एवं यहां तक कि स्टूडियो में शूट और रिकॉर्ड किए किए 331 गानों के भंडार के रूप में सामने आया है। मोबाइल फोन और इंटरनेट की क्षमता और संभावनाओं का भरपूर दोहन करते हुए इन कलाकारों की पहुंच से देश का कोई भी हिस्सा अछूता नहीं रहा और अब ये गाने न सिर्फ गांवों की चौपालों और समारोहों में बजाए जाएंगे बल्कि व्हाट्सऐप के जरिए जन-जन तक पहुंचाए जाएंगे।

आदिवासी इलाकों की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर किशोर और बाल विवाह की शिकार महिलाएं, सभी इस अभियान में शामिल हुई हैं और अब वे सिर्फ बातों से ही नहीं बल्कि संगीत के जरिए अपने प्रतिरोध को स्वर दे रही हैं।

‘बदलाव के लिए संगीत’ पहल में शामिल 17 राज्यों के गैर सरकारी संगठनों को नमूने के तौर पर एक खाका बना कर दिया गया था और उन्हें तीन अक्तूबर तक अपनी भाषा या बोली में गाना रिकार्ड कर साझा करने को कहा गया था। इन संगठनों से कहा गया था कि वे स्थानीय परिवेश के हिसाब से गाने के बोल में बदलाव कर सकते हैं।

कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन्स फाउंडेशन के इंडिया हेड रवि कांत ने बदलाव के लिए संगीत के जरिए अभियान की महत्ता बताते हुए कहा, “संगीत आत्मा की भाषा है और दुर्गम से दुर्गम या सुदूरतम कोनों में पहुंचने की इसकी क्षमता जगजाहिर है। एक सुरीले और प्रभावी संगीत में आत्मा को झकझोरने और बेड़ियों को तोड़ने की कूव्वत होती है। ‘बदलाव के लिए संगीत’ अभियान में देश के कोने-कोने से बड़े पैमाने पर महिलाओं के जुड़ाव और देश से बाल विवाह को खत्म करने के दृढ़ निश्चय की अभिव्यक्ति वाले उनके गानों से विवाह मुक्त भारत’ अभियान को नई उर्जा और बल मिला है। जमीनी स्तर पर इस तरह के दृढ़ संकल्प और भागीदारी से इस अभियान को अपार उर्जा मिली है और इसका आंधी-तूफान की रफ्तार से प्रसार हुआ है।”

गाने के मूल बोल को सभी लोगों के साथ साझा किया गया था। इसमें आह्वान किया गया था कि वे चाहे जिस गांव या पेशे में हों, समाज की सूरत बदलने के लिए इस अभियान से जुड़ जाएं। उनसे आह्वान किया गया था कि वे जहां हों, और पास में जो भी छोटे-बड़े संसाधन या औजार हों, उसी के साथ इस अभियान में शामिल हो जाएं। ये गाना लोगों से कहता है, “हर गांव का नक्शा बदलने के लिए चलो…कैंची चलाने वालो कैंची लिए उठो, ठेला चलाने वालो ठेला लिए उठो…हर गांव से उठो, हर पक्ष से उठो।”

इस अभियान में अंडमान, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, झारखंड, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओड़ीशा, राजस्थान, तेलंगाना, तमिलनाडु, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे 17 राज्यों के गैर सरकारी संगठनों ने हिस्सा लिया।

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