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Dehradun Registry भ्रष्टाचार: रक्षा मंत्रालय की जमीन का फर्जी बैनामा बनाने वाला एक और अधिवक्ता गिरफ्तार

Dehradun Registry भ्रष्टाचार: एक और अधिवक्ता गिरफ्तार जो रक्षा मंत्रालय की जमीन का फर्जी बैनामा बनता है

Dehradun Registry Fraud के बारे में खबर: अब तक एसआईटी रजिस्ट्री ने फर्जीवाड़े में तीन अधिवक्ताओं को गिरफ्तार किया है। मामले में अभी अधिक लोग गिरफ्तार किए जा सकते हैं।

बृहस्पतिवार रात देहरादून में रजिस्ट्री फर्जीवाड़े में दून के एक और अधिवक्ता देवराज तिवारी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी ने रक्षा मंत्रालय की जमीन का फर्जी बैनामा लिखा था। इसके बाद एसडीएम कोर्ट और हाईकोर्ट में जमीन के अधिग्रहण का वाद भी दायर किया।

अब तक एसआईटी रजिस्ट्री ने फर्जीवाड़े में तीन अधिवक्ताओं को गिरफ्तार किया है। मामले में अभी अधिक लोग गिरफ्तार किए जा सकते हैं। रक्षा मंत्रालय की 55 बीघा जमीन का फर्जी बैनामा बनाने के आरोप में नगीना, बिजनौर के हुमायूं परवेज को गिरफ्तार कर लिया गया, एसएसपी अजय सिंह ने बताया।

Dehradun Registry भ्रष्टाचार: रक्षा मंत्रालय की जमीन का फर्जी बैनामा बनाने वाला एक और अधिवक्ता गिरफ्तार

एसआईटी ने उससे पूछताछ की तो उसने देहरादून की एक जेल में काम करने वाले अधिवक्ता देवराज तिवारी का नाम बताया। देवराज तिवारी, मधुर विहार फेज टू, बंजारावाला, को बृहस्पतिवार देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी ने कहा कि 2014 में मदन मोहन शर्मा (दूधली) की ओर से माजरा स्थित इस जमीन का मुकदमा लड़ रहा था।

2017 में Sharma ने मुकदमे को वापस ले लिया। उस समय वह समीर कामयाब के गोल्डन फॉरेस्ट केस में भी मुकदमा चलाता था। एक दिन, हुमायूं परवेज समीर के चैंबर में आया। दोनों ने माजरा की जमीन पर एक फर्जी बैनामा बनाने की योजना बनाई। समीर ने सहारनपुर के रजिस्ट्रार ऑफिस से आवश्यक जानकारी प्राप्त की क्योंकि वह वहाँ से परिचित थी।

इसके बाद उन्होंने 1958 में जमीन के असली मालिक लाला सरनीमल और लाला मणिराम के नाम से फर्जी बैनामा बनाया। हुमायूं और समीन के पिता जलीलूह रहमान ने इसका नामकरण किया। सना नाम की एक लड़की ने इस बैनामे को रजिस्ट्री के कागजों में ड्राफ्ट किया, जिसे अधिवक्ता देवराज तिवारी ने अंग्रेजी में लिखा था।

Dehradun Registry भ्रष्टाचार: रक्षा मंत्रालय की जमीन का फर्जी बैनामा बनाने वाला एक और अधिवक्ता गिरफ्तार

बताया गया है कि आरोपियों ने सहारनपुर रिकॉर्ड रूम में जिल्द चिपकाने के लिए देव कुमार का सहारा लिया। उसने इस कार्य के लिए तीन लाख रुपये प्राप्त किए। तीन-चार दिन बाद, एसडीएम कोर्ट में नकल लेकर इसे पकड़ने का वाद दाखिल किया गया।

भी रद्दी की दुकान से कागजात

समीर ने फर्जी रजिस्ट्री बनाने के लिए सहारनपुर में एक कबाड़ी अब्दुल गनी की दुकान पर भी जाकर देखा। वहाँ से काफी पुराना कागज निकाला गया था। समीर ने पेपर की बिल्कुल उसी साइज की लाइनिंग और कटिंग की। कार्ड वालों के यहां छपाई समीर ने करवाई। कॉफी या चाय के पानी में फर्जी रजिस्ट्री के पेपर को डुबाकर उन्हें सुखाते हुए उन पर प्रेस कर तैयार किया गया।

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