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झारखंड में किसान और खेतिहर मजदूरों को अब ‘बिरसा किसान’ के नाम से जाना जाएगा- CM हेमंत सोरेन

झारखंड में अब किसानों को नए नाम से जाना जाएगा। यहां अब किसानों और खेतिहर मजदूरों व खेती से जुड़े सभी लोगों को एक नाम- ‘बिरसा किसान’ के नाम से जाना जाएगा। राज्य में किसानों की पगड़ी का रंग भी गुलाबी से बदलकर हरा कर दिया गया है। विश्व आदिवासी दिवस पर बदल गए किसान के नाम:झारखंड में किसान और खेतिहर मजदूरों को अब बिरसा किसान के नाम से जाना जाएगा। CM हेमंत सोरेन ने सोमवार को विश्व आदिवासी दिवस पर कृषि, पशुपालन व सहकारिता विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि झारखंड के किसान का इतिहास अन्य राज्यों से अलग हैं। हमारे पूर्वज इस राज्य के जल, जंगल जमीन को बचाने का संघर्ष उस समय से कर रहे हैं, जब लोगों ने इसका सपना भी नहीं देखा था। आजादी की लड़ाई से पहले से हमारे पूर्वज इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। CM हेमंत सोरेन ने यहां कहा- ‘यह हमारा दुर्भाग्य है कि हमें अंडा दूसरे राज्यों से इंपोर्ट करना पड़ता है। जबकि यह हमारी पारंपरिक व्यवस्थाएं है। गांव में गाय, बकरी, मुर्गी, सुअर के साथ नीम, बेर, महुआ और मुनगा का पेड़ भी होना चाहिए। यही हमारी पूंजी थी, लेकिन ये कहां गायब हो गई ये हम समझ ही नहीं पा रहे हैं।’ CM ने कहा- ‘लाह, सिल्क देश में ज्यादा पैदा करने वाला राज्य झारखंड है। हम इसके लिए खूब मेहनत करते हैं। मेहनत करके उत्पादन तो जरूर करते हैं, लेकिन फल दूसरे राज्य के लोग खाते हैं। उन्होंने बताया कि इस पर रोक लगाने के लिए फेडरेशन का गठन किया जा रहा है। आखिरी चरण में है। इसका उद्देश्य वनोपज की उचित मूल्य का निर्धारण करना है।

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