जनता के सुझावों से तैयार होगी देहरादून की महायोजना-2041ः बंशीधर तिवारी
admin
08/04/2026
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देहरादून (नेशनल वार्ता)। राजधानी देहरादून को वर्ष 2041 तक एक आधुनिक, सुव्यवस्थित, पर्यावरण-अनुकूल और बेहतर सुविधाओं से लैस शहर बनाने की दिशा में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) का जनसंवाद अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। महायोजना-2041 के तहत आयोजित जनसुनवाई में बड़ी संख्या में नागरिकों, भू-स्वामियों, व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर शहर के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराईं। एमडीडीए अधिकारियों ने सभी प्रतिभागियों को भरोसा दिलाया कि प्राप्त प्रत्येक सुझाव और आपत्ति का तकनीकी तथा विधिक स्तर पर गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा, ताकि अंतिम महायोजना अधिक व्यावहारिक, संतुलित और जनहितकारी बन सके। जनसुनवाई में लोगों की सक्रिय भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि राजधानी के विकास को लेकर नागरिकों में व्यापक जागरूकता और सकारात्मक सोच है। बैठक के दौरान नागरिकों ने बढ़ती आबादी और तेज़ी से फैलते शहरी क्षेत्र को देखते हुए सड़क नेटवर्क के विस्तार, आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और पर्याप्त पार्किंग सुविधाओं की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही नई कॉलोनियों और विकसित हो रहे क्षेत्रों में जलापूर्ति, सीवर, ड्रेनेज, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने की मांग भी उठाई गई। लोगों का कहना था कि महायोजना आने वाले दो दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जानी चाहिए। जनसुनवाई में पर्यावरण संरक्षण भी प्रमुख विषय रहा। नागरिकों ने शहर के हरित क्षेत्रों, प्राकृतिक जल स्रोतों और खुले सार्वजनिक स्थलों को सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी प्रावधान करने की आवश्यकता बताई। वर्षा जल संचयन, भूजल संरक्षण और जलभराव जैसी समस्याओं के स्थायी समाधान को भी महायोजना का अहम हिस्सा बनाने का सुझाव दिया गया। प्रतिभागियों ने कहा कि देहरादून की असली पहचान उसकी प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली है, जिसे विकास के साथ सुरक्षित रखना जरूरी है। भू-स्वामियों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने क्षेत्रवार आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भूमि उपयोग और विकास नियंत्रण नियम तय करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि प्रत्येक क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास मॉडल तैयार किया जाना चाहिए। एमडीडीए ने आश्वासन दिया कि सभी सुझावों का विस्तृत अध्ययन कर अंतिम महायोजना को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि महायोजना-2041 केवल विकास का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के देहरादून का विजन है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की भागीदारी से ही ऐसी योजना तैयार होगी, जो शहर की वास्तविक जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों का समाधान कर सके।
वहीं, एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जा रहा है। विशेषज्ञों की टीम प्रत्येक बिंदु का तकनीकी और कानूनी परीक्षण करेगी, ताकि अंतिम महायोजना विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन स्थापित कर सके।